
भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने स्वीडन के स्टॉकहोम कॉन्सर्ट हॉल में नोबेल पुरस्कार ग्रहण किया। अभिजीत बनर्जी को वर्ष 2019 के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। उन्हें यह पुरस्कार फ्रांस की एस्थर डुफ्लो (अभिजीत बनर्जी की पत्नी) और अमेरिका के माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से दिया गया है। इस पुरस्कार के लिए तीन विजेताओं के बीच 9 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 6.5 करोड़ रुपये) का पर्स दिया गया है। बता दें कि अभिजीत बनर्जी ने ‘वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए एक प्रायोगिक दृष्टिकोण’ की खोज की थी।
इस मौके पर अभिजीत बनर्जी बंदगला कोर्ट और धोती पहने नजर आए, और उनकी पत्नी एस्टर डफ्लो ने नीले रंग की साड़ी पहनी। वहीं उनके सहयोगी सूट पहनकर अवार्ड लेने पहुंचे।
अभिजीत बनर्जी का जन्म 21 फरवरी, 1961 को मुंबई में हुआ था। उनकी मां का नाम निर्मला बनर्जी और पिता का नाम दीपक बनर्जी हैं। उनकी मां सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइंसेज में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर रह चुकी हैं। पिता दीपक कलकत्ता के प्रसिडेंट कॉलेज में अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष रह चुके हैं। अभिजीत बनर्जी ने कलकत्ता यूनिवर्सिटी और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की हैं। 1988 में उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की।
अभिजीत बनर्जी का एमआईटी की लेक्चरार डॉक्टर अरुणधति तुली बनर्जी से विवाह हुआ था। हालांकि बाद में उनका तलाक हो गया। इसके बाद उन्होंने 2015 में अर्थशास्त्री एस्थर डफलो के साथ विवाह किया। अभिजीत ने 2003 में एस्थर डुफ्लो और सेंधिल मुलाइनाथन के साथ मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पॉवर्टी एक्टशन लैब की स्थापना की।
अभिजीत ब्यूरो फॉर द रिसर्च इन द इकनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलेपमेंट के पूर्व अध्यक्ष, अमेरिकी अकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस और द इकनॉमेट्रिक सोसाइटी के रिसर्च एसोसिएट रह चुके हैं। वे काइल इंस्टीट्यूट के इंटरनेशनल, गुगेनहियम और अल्फ्रेड पी सोलान के फेलो भी रहे हैं। वे इंफोसिस प्राइज भी जीत चुके हैं। अभिजीत पुअर इकनॉमिक्स समेत चार किताबों के लेखक हैं। उन्होंने दो डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का निर्देशन भी किया है। अभिजीत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 2015 के बाद के विकास एजेंडा के लिए बनाए गए अग्रणी लोगों केक हाई-लेवल पैनल के सचिव भी रह चुके हैं।
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Published: 11 Dec 2019, 10:42 AM IST