अर्थतंत्र

अर्थतंत्र की खबरें: भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 1,048 अंक लुढ़का और रुपया भी लुढ़का

वैश्विक बाजारों में कमजोरी के रुख के बीच शुक्रवार को धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली होने से घरेलू शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,048 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 336 अंक टूटा।

शेयर बाजार फिर धड़ाम
शेयर बाजार फिर धड़ाम  फोटोः सोशल मीडिया

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,048.16 अंक या 1.25 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,626.76 और निफ्टी 336.10 अंक या 1.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,471.10 पर था।

बाजार में गिरावट का नेतृत्व मेटल शेयरों ने किया। इसके कारण सूचकांकों में निफ्टी मेटल (3.31 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (2.24 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी (2.23 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (2.04 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (1.90 प्रतिशत), निफ्टी ऑयलएंडगैस (1.88 प्रतिशत), निफ्टी पीएसई (1.68 प्रतिशत) और निफ्टी कंजप्शन (1.63 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में एचयूएल, इटरनल, टाटा स्टील, टाइटन, टीसीएस, पावर ग्रिड, बीईएल, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एचसीएल टेक, एनटीपीसी, इन्फोसिस, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इंडिगो लूजर्स थे। वहीं, बजाज फाइनेंस और एसबीआई ही केवल हरे निशान में बंद हुए ।

लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,032.85 अंक या 1.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,438 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 311.20 अंक या 1.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,032.90 पर बंद हुआ।

एलकेपी सिक्योरिटीज में रूपक दे ने कहा कि अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत के बाद निफ्टी की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। दिन अंत में इंडेक्स एक बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। इंडिया विक्स फिर से 200 डीएमए के पार चला गया है, जो बाजार भागीदारों के बढ़ते डर को दिखाता है।

उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए सपोर्ट 25,500 के आसपास है। अगर यह टूटता है तो निफ्टी 25,000 के आंकड़े को भी छू सकता है। इसके लिए रुकावट का स्तर 25,800 के आसपास है।

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रुपया तीन पैसे टूटकर 90.64 प्रति डॉलर पर बंद

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को तीन पैसे की गिरावट के साथ 90.64 (अस्थायी) पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजार में नकारात्मक रुख और वैश्विक बाजारों में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती से रुपये में गिरावट आई।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि डॉलर की मजबूती ने रुपये सहित उभरते बाजारों की मुद्राओं की बढ़त को सीमित कर दिया। इससे रुपया एक सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, डॉलर के मुकाबले रुपया 90.69 पर खुला, और कारोबार के दौरान 90.60 के दिन के उच्चतम स्तर तक गया और 90.79 के निचले स्तर तक आया। अंत में, रुपया 90.64 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की गिरावट है।

बृहस्पतिवार को, डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे की मजबूती के साथ 90.61 पर बंद हुआ था।

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नई सीपीआई सीरीज में महंगाई दर 4 प्रतिशत से नीचे रहने की उम्मीद, दिखाएगी खर्च पैटर्न की स्पष्ट तस्वीर: रिपोर्ट

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई सीरीज में भी महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने की उम्मीद है। यह नई सीरीज भारत में लोगों के बदलते खर्च के तरीके को बेहतर ढंग से दिखाएगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नीति बनाने में मदद करेगी। शुक्रवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

बीओबी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य महंगाई (कोर इंफ्लेशन) पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बना रहता है। हालांकि, नई सीरीज में अलग-अलग चीजों का संतुलित महत्व (वेटेज) रखा गया है, जिससे महंगाई 4+/-2 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है।

बैंक ने कहा कि नई सीरीज से महंगाई का मुख्य आंकड़ा ज्यादा सही और आधुनिक होगा, जो मौद्रिक नीति (ब्याज दर जैसे फैसले) के लिए महत्वपूर्ण है। नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों के मौसमी उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से शामिल किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर सरकार के आपूर्ति से जुड़े कदम खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद करेंगे। बैंक ऑफ बड़ौदा के जरूरी वस्तु सूचकांक (ईसीआई) के अनुसार, फरवरी 2026 के पहले 11 दिनों में जरूरी चीजों की कीमतों में सालाना आधार पर 0.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। केवल कुछ खाद्य तेल और दालों को छोड़कर बाकी खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी नियंत्रण में हैं।

नई सीरीज में पहले की तुलना में खाद्य महंगाई में बदलाव देखा गया है। पुरानी सीरीज में पिछले सात महीनों से खाद्य महंगाई घट रही थी, लेकिन नई सीरीज में इसमें हल्की बढ़ोतरी दिखी है। बैंक ने इस बदलाव का कारण सीपीआई की सबसे अस्थिर टोकरी, यानी टमाटर, प्याज और आलू जैसी सब्जियों के भार में कमी को बताया है।

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