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अर्थतंत्र की खबरें: सोना-चांदी पड़े सुस्त, डॉलर के मुकाबले रुपया 14 पैसे मजबूत

कारोबारियों ने कहा कि दो सत्रों के ठहराव के बाद सोने की कीमतों में गिरावट फिर से शुरू हो गई और यह तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर आ गई, जबकि चांदी में निरंतर गिरावट जारी रही।

फोटोः IANS
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 राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने की कीमत में गिरावट का सिलसिला फिर शुरू हुआ और यह तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की कीमत 800 रुपये टूटकर 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर रही। स्थानीय मांग कमजोर रहने के कारण चांदी भी 2,000 रुपये लुढ़क गयी।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 800 रुपये घटकर 1,45,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई। बृहस्पतिवार को यह 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम रही थी।

चांदी भी 2,000 रुपये टूटकर 2,22,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर सहित) पर रही। पिछले सत्र में चांदी 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। सोना 25 जून को 1,45,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।

कारोबारियों ने कहा कि दो सत्रों के ठहराव के बाद सोने की कीमतों में गिरावट फिर से शुरू हो गई और यह तीन सप्ताह के सबसे निचले स्तर पर आ गई, जबकि चांदी में निरंतर गिरावट जारी रही।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 15.42 डॉलर यानी 0.39 प्रतिशत बढ़कर 3,992 डॉलर प्रति औंस हो गया। हालांकि, चांदी गिरावट के साथ 55.37 डॉलर प्रति औंस पर रही।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 96.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 675.15 अरब डॉलर पर

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 96.4 करोड़ डॉलर बढ़कर 675.15 अरब डॉलर पर रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इससे पिछले सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 7.26 अरब डॉलर बढ़कर 674.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।

इस साल 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने से पहले देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, संघर्ष के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा और रिजर्व बैंक को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद कई सप्ताह तक विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट दर्ज की गई।

केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के प्रमुख घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 93 करोड़ डॉलर बढ़कर 546.51 अरब डॉलर हो गई।

डॉलर के संदर्भ में दर्शाई जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखी गई यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में होने वाली बढ़ोतरी या गिरावट का प्रभाव भी शामिल होता है।

प्रमुख कंपनियों में खरीदारी से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 965 अंक उछला

रिलायंस इंडस्ट्रीज, बैंक और आईटी शेयरों में खरीदारी आने से शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार जोरदार तेजी के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 965 अंक उछल गया जबकि निफ्टी ने 262 अंक की छलांग लगाई।

विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद घरेलू स्तर पर प्रमुख कंपनियों के अनुकूल तिमाही नतीजों और आईटी कंपनियों में लिवाली आने से निवेशक धारणा को समर्थन मिला। हालांकि व्यापक बाजार में नकारात्मक रुझान रहा।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 964.58 अंक यानी 1.25 प्रतिशत उछलकर 78,151.45 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,095.68 अंक चढ़कर 78,282.55 अंक तक पहुंच गया।

इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 261.55 अंक यानी 1.09 प्रतिशत बढ़कर 24,334.30 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स के समूह में शामिल शेयरों में टेक महिंद्रा का शेयर अनुकूल तिमाही नतीजों के बाद करीब 3.91 प्रतिशत उछला। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज का भी शेयर तिमाही नतीजों की घोषणा के पहले करीब तीन प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ।

रुपया 14 पैसे मजबूत होकर 96.28 प्रति डॉलर पर

रुपया शुक्रवार को 14 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.28 (अस्थायी) पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप के बाद घरेलू मुद्रा में लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट थमी।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से स्थानीय मुद्रा पर दबाव है।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.35 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 96.27 से 96.41 के दायरे में रहा। अंत में 96.28 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 14 पैसे की तेजी है।

रुपया बृहस्पतिवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ 17 पैसे कमजोर होकर 96.42 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कोषागार प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘‘संभवतः आरबीआई के हस्तक्षेप से शुक्रवार को रुपये में स्थिरता रही और इसकी चार सत्र की गिरावट थमी।’’

एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (शोध विश्लेषक-जिंस एवं मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि आगे की दिशा तय करने के लिए बाजार की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों पर रहेगी।

ईपीएफओ ने विवादों के आसान निपटारे के लिए “विश्वास, 2026” पहल शुरू की

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने नई एकमुश्त विवाद समाधान पहल "विश्वास, 2026" शुरू की है, जिसका उद्देश्य कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 की धारा 14बी और सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 128 के तहत क्षतिपूर्ति लगाने से संबंधित विवादों का सौहार्दपूर्ण निपटारा करना है। यह जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को दी गई।

यह योजना ईपीएफ योजना, 2026 के भाग के रूप में दिनांक 29 जून 2026 को जीएसआर 525(ई) के माध्यम से अधिसूचित की गई है और 29 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। यह अधिसूचना की तिथि से छह महीने की अवधि तक परिचालन में रहेगी।

विश्वास, 2026 योजना को स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने, मुकदमेबाजी को कम करने और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हुए जुर्माने/क्षतिपूर्ति से संबंधित काफी समय से लंबित विवादों के शीघ्र समाधान को सक्षम बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। यह योजना नियोक्ताओं को एक पारदर्शी, पूर्णतः डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया के माध्यम से पात्र मामलों को निपटाने का अवसर प्रदान करती है।

इस योजना में चार व्यापक श्रेणियों के मामले शामिल हैं, जिसमें पहली श्रेणी में ऐसे मामले हैं जिनमें जुर्माने/क्षतिपूर्ति के आदेशों को न्यायिक मंच के समक्ष चुनौती दी गई हो। दूसरी में अंतिम जुर्माने के आदेश जहां वसूली लंबित है या केवल आंशिक रूप से की गई है, जिसमें वसूली प्रमाणपत्र (आरआरसी) मामले भी शामिल हैं।

वहीं, तीसरी श्रेणी में ऐसे मामले जिनमें नोटिस जारी किए जा चुके हैं लेकिन जुर्माने के संबंध में अंतिम आदेश अभी पारित नहीं किए गए हैं। और चौथी श्रेणी में ऐसे मामले शामिल हैं, जिनमें जुर्माने/क्षतिपूर्ति के नोटिस अभी जारी नहीं किए गए हैं।

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