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अर्थतंत्र की खबरें: 24 घंटे में ₹5000 लुढ़का सोना और वैश्विक अस्थिरता से शेयर बाजार सुस्त

इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 5,373 रुपए कम होकर 1,47,146 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,52,519 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

फोटो: IANS
फोटो: IANS 

सोने की कीमतों में बुधवार को बड़ी बिकवाली देखने को मिली है। इससे दाम कम होकर करीब 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पहुंच गया है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 5,373 रुपए कम होकर 1,47,146 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,52,519 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

22 कैरेट सोने का दाम 1,39,707 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,34,786 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। 18 कैरेट सोने का दाम घटकर 1,10,360 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,14,389 रुपए प्रति 10 ग्राम था।

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है। चांदी का दाम 12,655 रुपए कम होकर 2,33,283 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,45,938 रुपए प्रति किलो था।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,702 रुपए और चांदी का 3 जुलाई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.06 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,33,621 रुपए पर था।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में बड़ी कमजोरी देखने को मिली है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 2.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,171 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63.618 डॉलर प्रति औंस थी।

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वैश्विक अस्थिरता के बीच सेंसेक्स सपाट बंद, मिडकैप और स्मॉलकैप में हुई बिकवाली

वैश्विक अस्थिरता के चलते भारतीय शेयर बाजार के मुख्य सूचकांक बुधवार के कारोबारी सत्र में सपाट बंद हुए। दिन के अंत में सेंसेक्स 64.42 अंक की मामूली तेजी के साथ 73,983.18 और निफ्टी 27.15 अंक की मामूली कमजोरी के साथ 23,214.95 पर था।

व्यापक बाजारों में बड़ी बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 905.25 अंक या 1.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 59,810.20 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 241.10 अंक या 1.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 17,822.50 पर बंद हुआ।

निफ्टी मीडिया, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी पीएसई, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी ऑयलएंडगैस और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में बंद हुए।

दूसरी तरफ, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी सर्विसेज हरे निशान में थे।

सेंसेक्स एचयूएल, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईटीसी, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, सन फार्मा, पावर ग्रिड और टीसीएस हरे निशान में थे। इटरनल, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, टाइटन, एचसीएल टेक, एमएंडएम, भारती एयरटेलस, एनटीपीसी, बीईएल, इन्फोसिस और ट्रेंट लाल निशान में बंद हुए।

बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोल, हांगकांग, टोक्यो और अन्य वैश्विक बाजारों में गिरावट भारतीय बाजार में बिकवाली की एक वजह है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। मंगलवार को एफआईआई ने इक्विटी में 4,566.03 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका-ईरान के बीच ताजा तनाव ने भारत के साथ वैश्विक बाजारों पर दबाव बनाने का काम किया। इससे कच्चे तेल में भी तेजी देखी जा रही है, जिससे ब्रेंट क्रूड फिर से 92 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

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आरबीआई के उपाय 70 अरब डॉलर तक विदेशी पूंजी कर सकते हैं आकर्षित: इंडिया रेटिंग्स

भारतीय रिजर्व बैंक के एफसीएनआर (बी) जमा एवं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के बाह्य यानी विदेशी वाणिज्यिक उधारी से जुड़े विदेशी मुद्रा अदला-बदली उपायों से 60 से 70 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी आकर्षित हो सकती है, जिससे रुपये को समर्थन मिलेगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने बुधवार को यह कहा।

केंद्रीय बैंक ने आठ जून को घोषणा की थी कि अधिकृत डीलर बैंक तीन से पांच वर्ष की परिपक्वता वाले विदेशी मुद्रा प्रवासी (बैंक) (एफसीएनआर बी) जमा के लिए 30 सितंबर तक आरबीआई की अदला-बदली सुविधा का उपयोग कर सकते हैं। यह सुविधा बैंकों को अमेरिकी डॉलर जमा को नियामक के साथ अदला-बदली करने तथा मुद्रा जोखिम प्रबंधन में मदद करेगी।

आरबीआई के विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ाने के लिए घोषित उपायों में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को 30 सितंबर तक ईसीबी जुटाने के लिए रियायती मुद्रा अदला-बदली सुविधा भी शामिल है।

इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि एफसीएनआर (बी) विदेशी पूंजी जुटाने में अहम भूमिका निभाएगा जिसमें हेजिंग यानी जोखिम बचाव से जुड़े लागत का भार आरबीआई उठाएगा और बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को बेहतर रिटर्न दे सकेंगे।

रेटिंग एजेंसी ने बयान में कहा, ‘‘ इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर पूंजी प्रवाह उत्पन्न करेगी, जो 60 से 70 अरब डॉलर के दायरे में हो सकता है। इससे रुपये को महत्वपूर्ण सहारा मिलेगा और वित्तीय प्रणाली में व्यापक वित्त पोषण दबाव कम होगा।’’

मजबूत पूंजी प्रवाह की इस पृष्ठभूमि में मुद्रा पहले 95 रुपये प्रति डॉलर से नीचे आकर 90 रुपये के करीब पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 में यह औसतन लगभग 93.10 रुपये के स्तर पर रह सकती है। मुद्रा की दिशा मुद्रास्फीति, ब्याज दरों और पूंजी प्रवाह के रुझान पर निर्भर करेगी।

इंडिया रेटिंग्स ने कहा कि एफसीएनआर (बी) जमा और ईसीबी की सफलता निकट अवधि में रुपये की चाल के लिए महत्वपूर्ण होगी।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने ऊर्जा कीमतों को बढ़ाया है जिससे व्यापार घाटा बढ़ा और रुपये पर दबाव पड़ा है। बड़े पूंजी निकासी ने भी मुद्रा को कमजोर किया है।

नीति निर्माताओं ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए उपाय किए हैं। इनका उद्देश्य केवल रुपये को स्थिर करना ही नहीं बल्कि बाहरी संतुलन सुधारना और वैश्विक बाजार एकीकरण को बढ़ाना भी है।

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छोटी राशि के कर्ज देने वाले संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना अगस्त तक बढ़ाई गई

सरकार ने सूक्ष्म-वित्त संस्थानों (एमएफआई) के लिए ऋण गारंटी योजना 'सीजीएसएमएफआई-2.0' की अवधि बढ़ाने और अधिकतम ऋण सीमा को 1,000 करोड़ रुपये तक करने को मंजूरी दी है।

वित्त मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि इस योजना के तहत अब तक 770 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

यह योजना 20 मार्च, 2026 को शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को एमएफआई और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी-एमएफआई) को दिए गए ऋण पर संभावित नुकसान के खिलाफ गारंटी कवर प्रदान करना है।

यह गारंटी 'राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड' (एनसीजीटीसी) के माध्यम से दी जाती है। यह योजना 30 जून, 2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये तक के ऋण पर गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, वैध थी।

मंत्रालय ने कहा कि अब योजना की वैधता 31 अगस्त, 2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये तक के ऋण पर गारंटी जारी नहीं होने तक बढ़ा दी गई है।

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रुपया 14 पैसे चढ़कर डॉलर के मुकाबले 95.27 पर

रुपया बुधवार को 14 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.27 (अस्थायी) पर रहा। अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने तथा घरेलू मुद्रा में और गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि शुरुआती नुकसान को कम करते हुए रुपया अंत में सकारात्मक स्तर पर बंद हुआ। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी डॉलर सूचकांक में नरमी से भी रुपये को समर्थन मिला।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.52 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले 95.07 के उच्च और 95.56 के निचले स्तर तक पहुंचा। अंत में यह 95.27 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से 14 पैसे की बढ़त है।

रुपया मंगलवार को 20 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.41 पर बंद हुआ था।

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