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अर्थतंत्र की खबरें: भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सोना हुआ सस्ता, चांदी महंगी और रुपया में गिरावट जारी

घरेलू बाजार अभी कंसोलिडेशन फेस में है और मिलेजुले रुझानों के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुई हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान शांति समझौते की नाजुक स्थिति का असर अभी भी बाजार की धारणा पर बना हुआ है, जिसके कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 249.70 अंक या 0.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,478.67 और निफ्टी 80.50 अंक या 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,865.75 पर था।

एकतरफ लार्जकैप में बिकवाली देखी गई। वहीं, दूसरी तरफ मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 230.40 अंक या 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 61,797.70 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 190 अंक या 1.02 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,863.10 पर था।

सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.37 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.31 प्रतिशत के साथ टॉप गेनर थे। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स,निफ्टी फार्मा, निफ्टी मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी हेल्थकेयर हरे निशान में बंद हुआ। वहीं, निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी सर्विसेज लूजर्स थे।

सेंसेक्स पैक में मारुति सुजुकी, टाइटन, बजाज फाइनेंस, इटरनल, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, इंडिगो, ट्रेंट, एनटीपीसी और पावर ग्रिड गेनर्स थे। इन्फोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, आईटीसी, एचयूएल, एसबीआई, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक और बीईएल लूजर्स थे।

जानकारों के मुताबिक, घरेलू बाजार अभी कंसोलिडेशन फेस में है और मिलेजुले रुझानों के साथ सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक चिंताएं कम हुई हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान शांति समझौते की नाजुक स्थिति का असर अभी भी बाजार की धारणा पर बना हुआ है, जिसके कारण निवेशक सतर्क बने हुए हैं।

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सोना 800 रुपये सस्ता हुआ, चांदी 6,000 रुपये महंगी

घरेलू बाजार में कम मांग के कारण मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 800 रुपये घटकर 1.45 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई।

अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत सोमवार के 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव से 800 रुपये घटकर 1,45,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) रह गई।

हालांकि, चांदी में जोरदार वापसी हुई और लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला टूट गया। इसकी कीमत 6,000 रुपये बढ़कर 2,30,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गई। पिछले सत्र में चांदी की कीमत 2,24,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार में सोना दबाव में रहा, जबकि हालिया गिरावट के बाद चांदी में कम कीमत पर लिवाली देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना मामूली बढ़त के साथ 4,021.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 58.81 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

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रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 94.65 प्रति डॉलर पर

रुपया मंगलवार को 14 पैसे कमजोर होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.65 (अस्थायी) पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि मासान्त अंत की आयातकों और कंपनियों की डॉलर मांग से घरेलू मुद्रा पर दबाव है और वैश्विक बाजार में जोखिम न लेने की निवेशकों की प्रवृत्ति के कारण रुपये में गिरावट आई है।

हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता और केंद्रीय बैंक के संभावित हस्तक्षेप ने मुद्रा को सहारा दिया और इसकी गिरावट सीमित रही।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.60 प्रति डॉलर पर खुला और अंत में 94.65 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव की तुलना में 14 पैसे कम है।

रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे कमजोर होकर 94.51 पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, ‘‘रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ है। इसकी वजह डॉलर में लगातार निवेश का प्रवाह और कंपनियों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग है। वैश्विक बाजार में जोखिम से बचने के रुझान के कारण घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।’’

परमार ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 95.10 से 94.40 के दायरे में रह सकता है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 101.34 पर रहा।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72.88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा।

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फेड की सख्त नीति और पश्चिम एशिया तनाव के चलते सोने-चांदी की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) और वैश्विक बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की आशंकाओं ने निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी से दूर कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो सोना अक्टूबर 2008 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर सकता है।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स पर मंगलवार को कारोबार की शुरुआत से ही कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दिया।

अगस्त डिलीवरी वाला सोना आज अपने पिछले बंद 1,42,402 रुपए से 1,516 रुपए यानी 1 प्रतिशत गिरकर 1,40,886 प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में यह 1.37 प्रतिशत यानी 1,952 रुपए गिरकर 1,40,450 रुपए के दिन के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया।

हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी हुई और खबर लिखे जाने तक इसमें 0.15 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

वहीं, सितंबर डिलीवरी वाली चांदी की बात करें तो यह आज अपने पिछले बंद 2,22,634 रुपए से 1 प्रतिशत यानी 2,387 रुपए गिरकर 2,20,247 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुला और यही दिन का निम्नतम स्तर रहा।

हालांकि बाद के कारोबार में इसमें भी मामूली बढ़त दर्ज की गई और खबर लिखे जाने तक इसमें 0.12 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। स्पॉट गोल्ड करीब 1.5 प्रतिशत टूटकर 3,956.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। जून महीने में अब तक सोने की कीमत लगभग 12.7 प्रतिशत गिर चुकी है और यह लगातार चौथे महीने कमजोरी की ओर बढ़ रहा है।

इसी तरह स्पॉट सिल्वर 2 प्रतिशत गिरकर 57.13 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। प्लेटिनम 1.1 प्रतिशत और पैलेडियम 0.4 प्रतिशत कमजोर हुआ। ये तीनों कीमती धातुएं भी इस महीने और पूरी तिमाही में गिरावट दर्ज करने की ओर अग्रसर हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। यही वजह है कि बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए आगे भी ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर डॉलर को मजबूत बनाती हैं और सोने जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों की मांग घटा देती हैं।

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