
भारतीय शेयर बाजार लगातार सात सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,537.72 और निफ्टी 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,231.85 पर था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व मीडिया, रियल्टी और प्राइवेट बैंक ने किया। सूचकांकों में निफ्टी मीडिया (2.13 प्रतिशत), निफ्टी रियल्टी (1.41 प्रतिशत) और निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.89 प्रतिशत) की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी आईटी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी इन्फ्रा सबसे ज्यादा बढ़ने वाले सूचकांक थे। निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी पीएसई और निफ्टी पीएसयू बैंक लाल निशान में बंद हुए।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 262.80 अंक या 0.41 प्रतिशत की तेजी के साथ 63,671.55 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 134.30 अंक या 0.68 प्रतिशत की मजबूती के साथ 19,841.45 पर था।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, एलएंडटी, एचयूएल, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम गेनर्स थे। टाटा स्टील, इंडिगो, एचसीएल टेक और टाइटन लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, बॉन्ड यील्ड में तेजी को रोकने के लिए यूएस ट्रेजरी के दखल से बाजार को बहुत जरूरी राहत मिली, जिससे जबरदस्त तेजी आई और घरेलू बाजार में हफ्ते भर से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। इस दखल से डॉलर कमजोर हुआ और इससे रुपए को मजबूती मिलने एवं यील्ड का दबाव कम होने से उभरते बाजार निवेशकों के लिए आकर्षण हो गए।
केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे प्रति ग्राहक नौ सिम की उच्चतम सीमा को किसी भी सब्सक्राइबर के लिए पार न करें। यह जानकारी गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में दी गई।
सरकारी की ओर से जारी सर्कुलर में कहा गया कि 24 अगस्त 2026 से, टीएसपी (टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर) ऐसे हर सब्सक्राइबर की पहचान करने के लिए जरूरी तकनीकी और संगठनात्मक उपाय करेंगे जो तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन लेना चाहता है। वे उसे सूचित करेंगे कि उसके पास पहले से ही किसी व्यक्ति के लिए अनुमत अधिकतम संख्या में मोबाइल कनेक्शन हैं और इसलिए, उसे नया मोबाइल कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है।"
इन निर्देशों के तहत ग्राहकों को 'कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म' (सीएएफ) में यह जानकारी देनी होगी कि उनके नाम पर अलग-अलग टेलीकॉम ऑपरेटरों और लाइसेंस प्राप्त सर्विस एरिया में पहले से कौन-कौन से मोबाइल कनेक्शन हैं।
डीओटी के सर्कुलर में बताया गया है कि जिन ग्राहकों ने तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन ले रखे हैं, उनकी जानकारी विभाग के द्वारा विकसित किए गए 'डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म' (डीआईपी) पर उपलब्ध है।
डीओटी ने टेलीकॉम ऑपरेटरों की मदद के लिए यह सिस्टम बनाया है ताकि वे ऐसे ग्राहकों की पहचान कर सकें, जिनके नाम पर मोबाइल कनेक्शन की तय सीमा पूरी हो चुकी है।
कोयला, रिफाइनरी उत्पाद, सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क का उत्पादन बढ़ने से देश के नौ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जुलाई में बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गई। बृहस्पतिवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, एक साल पहले जुलाई में इन प्रमुख उद्योगों का उत्पादन 3.2 प्रतिशत बढ़ा था। वहीं, जून, 2026 में इनकी वृद्धि दर छह प्रतिशत रही थी।
इस साल जून के महीने से इन आंकड़ों को नए आधार वर्ष 2022-23 के साथ जारी किया जा रहा है जबकि पहले आधार वर्ष 2011-12 था।
सरकार ने इस सूचकांक में लौह अयस्क को भी शामिल किया है, जिससे प्रमुख बुनियादी उद्योगों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक का उत्पादन घटा।
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) के दौरान इन नौ प्रमुख उद्योगों का उत्पादन 4.3 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में इनकी वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत रही थी।
तरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले शुरुआती बढ़त गंवाते हुए महज तीन पैसे के लाभ के साथ 95.70 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा।
डॉलर सूचकांक में कमजोरी से रुपये को शुरुआती समर्थन मिला, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने इसके लाभ को सीमित कर दिया।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से घरेलू मुद्रा पर कुछ हद तक गिरावट का दबाव कम होता है, लेकिन कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से भारत के आयात बिल पर दबाव बना रहेगा।
अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा दीर्घावधि के सरकारी बॉन्ड की पुनर्खरीद को दोगुना करने की घोषणा के बाद डॉलर सूचकांक मई के अंत के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया। इससे अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल दरें नीचे आईं।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान 95.56 से 95.72 के दायरे में रहा। अंत में यह अपने पिछले बंद भाव के मुकाबले तीन पैसे की बढ़त के साथ 95.70 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ।
रुपया बुधवार को लगभग स्थिर रहा था और एक पैसे की बढ़त के साथ 95.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.61 पर कारोबार कर रहा था।