
पिछले दिन की भारी गिरावट से उबरते हुए भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 0.30 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 238.22 अंक यानी 0.31 प्रतिशत बढ़कर 76,741.82 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 80.75 अंक या 0.34 प्रतिशत बढ़कर 23,962.80 पर पहुंच गया।
दिन के सत्र में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 76,503.60 से 72.53 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,576.14 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 823.04 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की उछाल के साथ 77,326.65 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,882.05 से 0.19 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 23,928.95 पर खुला और दिन के कारोबार में यह 252.65 अंकों यानी 1.05 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,134.70 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान, लगभग 2,793 शेयरों में तेजी, 1,263 शेयरों में गिरावट और 167 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.38 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन काफी हद तक सकारात्मक रहा, अधिकांश सूचकांकों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी रियल्टी शीर्ष लाभ कमाने वाला सूचकांक बनकर उभरा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया (2 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (1.6 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.6 प्रतिशत) का स्थान रहा।
दूसरी ओर, निफ्टी आईटी में 0.47 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी ऑटो में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी 50 में, सन फार्मा 2.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाली कंपनी के रूप में उभरी, उसके बाद भारती एयरटेल (2.4 प्रतिशत), बजाज फिनसर्व (2.3 प्रतिशत), इंडिगो (2 प्रतिशत), इटरनल (2 प्रतिशत) और ग्रासिम तथा कोटक महिंद्रा बैंक (1.9 प्रतिशत) के शेयरों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।
दूसरी ओर, डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज 5.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनी रही। इसके साथ ही मारुति सुजुकी (-1.7 प्रतिशत), ओएनजीसी (-1.4 प्रतिशत), इंफोसिस (-1.3 प्रतिशत), एनटीपीसी (-1.2 प्रतिशत) और हिंडाल्को (-1 प्रतिशत) के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
इस दौरान, निवेशकों ने एक ही सत्र में 5 लाख करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के 471.2 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 476.4 लाख करोड़ रुपए हो गया।
रुपया बृहस्पतिवार को सात पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.41 (अस्थायी) पर रहा। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजारों में डॉलर के मजबूत होने का रुख बना रहा।
पश्चिम एशिया में फिर से तनाव उत्पन्न होने के बाद पैदा हुई अस्थिरता के बावजूद शेयर बाजार में सुधार और सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की बिकवाली से स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिला
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.52 प्रति डॉलर पर खुला जो उसके पिछले बंद भाव से चार पैसे की गिरावट है। कारोबार के दौरान यह डॉलर के मुकाबले 95.58 से 95.28 के दायरे में रहा। अंत में यह 95.41 (अस्थायी) पर रहा जो पिछले बंद भाव से सात पैसा अधिक है। रुपया बुधवार को 52 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.48 पर बंद हुआ था।
विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप से स्थानीय मुद्रा को समर्थन मिला, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत डॉलर ने रुपये पर दबाव डाला।
कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में जुलाई के दौरान कपास की बुवाई महाराष्ट्र जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के मजबूत होने के साथ तेज़ हो गई है। पहले यह बुवाई खरीफ सत्र में पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत पीछे चल रही थी।
सिंह ने बताया कि पांच जुलाई तक कपास का रकबा 63.18 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 82 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी; हालांकि, बारिश में सुधार के साथ यह अंतर कम हुआ है।
उन्होंने कहा, "मानसून में सुधार हुआ है। जुलाई में अच्छी बारिश हो रही है और बुवाई में तेज़ी आई है।"
सिंह ने कहा कि भारत में कपास की बुवाई साल में दो बार होती है और बुवाई का समय क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है। बुवाई आमतौर पर पंजाब और हरियाणा में शुरू होती है और फिर तमिलनाडु तक फैलती है। बुवाई का समय आमतौर पर 15 जुलाई तक खत्म हो जाता है, लेकिन इस सत्र में मानसून में देरी के कारण इसे 30 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है।
भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में मध्य क्षेत्र में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश शामिल हैं; इसके बाद उत्तरी राज्यों में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान आते हैं; और दक्षिणी क्षेत्र में तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए