अर्थतंत्र

अर्थजगतः सेंसेक्स 1064 अंक टूटा, निफ्टी 332 अंक लुढ़का और गिरावट से निवेशकों के 4.92 लाख करोड़ रुपये डूबे

मारुति सुजुकी इंडिया ने मंगलवार को ऐलान किया कि कैलेंडर ईयर में कंपनी ने पहली बार 20 लाख वाहनों की बिक्री की है। संसद की एक समिति ने सरकार से कृषि उपज के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने की सिफारिश की है।

सेंसेक्स 1064 अंक टूटा, निफ्टी 332 अंक लुढ़का और गिरावट से निवेशकों के 4.92 लाख करोड़ रुपये डूबे
सेंसेक्स 1064 अंक टूटा, निफ्टी 332 अंक लुढ़का और गिरावट से निवेशकों के 4.92 लाख करोड़ रुपये डूबे फोटोः सोशल मीडिया

चौतरफा बिकवाली से सेंसेक्स 1064 अंक टूटा, निफ्टी 332 अंक फिसला

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 1,064 अंक लुढ़क गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 332.25 अंक फिसलकर 24,500 अंक से नीचे आ गया। अमेरिका में फेडरल रिजर्व के प्रमुख ब्याज दर पर निर्णय से पहले निवेशकों के सतर्क रुख के बीच चौरतरफा बिकवाली से बाजार नीचे आया। तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 1,064.12 अंक यानी 1.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80,684.45 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,136.37 अंक तक लुढ़क गया था।नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 332.25 अंक यानी 1.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,336 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल तीस शेयरों में सभी नुकसान में रहे। भारती एयरटेल, इंडसइंड बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट आई। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में ज्यादातर में गिरावट रही। अमेरिकी बाजार में सोमवार को गिरावट रही।

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शेयर बाजार में गिरावट से निवेशकों के 4.92 लाख करोड़ रुपये डूबे

शेयर बाजार में भारी बिकवाली के बीच मंगलवार को निवेशकों की संपत्ति 4.92 लाख करोड़ रुपये घट गई। इस दौरान लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,064.12 अंक या 1.30 प्रतिशत गिरकर 80,684.45 अंक पर बंद हुआ। इससे बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 4,92,644.06 करोड़ रुपये घटकर 4,55,13,913.24 करोड़ रुपये रह गया।

बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। सेंसेक्स के शेयरों में सभी कंपनियां नुकसान में बंद हुईं। इस दौरान भारती एयरटेल, इंडसइंड बैंक, जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एशियन पेंट्स, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक सबसे ज्यादा नुकसान में रहे।

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मारुति सुजुकी इंडिया ने पहली बार एक वर्ष में बेचे 20 लाख वाहन

मारुति सुजुकी इंडिया ने मंगलवार को ऐलान किया कि कैलेंडर ईयर में कंपनी ने पहली बार 20 लाख वाहनों की बिक्री की है। ऑटोमोबाइल कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन की ग्लोबल ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में मारुति सुजुकी इंडिया इस मील के पत्थर तक पहुंचने वाली पहली कंपनी बन गई। 20 लाख वाहनों में से लगभग 60 प्रतिशत हरियाणा में और 40 प्रतिशत गुजरात में बनाए गए हैं। मारुति सुजुकी इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर, हिसाशी ताकेउची ने कहा, "प्रोडक्शन का आंकड़ा 20 लाख यूनिट्स तक पहुंचना भारत की मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को दिखाता है और 'मेक इन इंडिया' पहल के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।" ताकेउची ने कहा, "यह उपलब्धि हमारे आपूर्तिकर्ता और डीलर भागीदारों के साथ मिलकर आर्थिक विकास को गति देने, राष्ट्र निर्माण में सहयोग देने और भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग को आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"

भारत से कुल यात्री वाहन निर्यात में मारुति सुजुकी की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत की है। कंपनी दुनिया भर के लगभग 100 देशों को 17 मॉडल निर्यात करती है। मारुति सुजुकी के पास भारत में तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिसमें से दो हरियाणा (गुरुग्राम और मानेसर) और गुजरात (हंसलपुर) में है। इन तीन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स की संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.5 लाख यूनटि्स है। कंपनी की योजना अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 40 लाख यूनिट्स करने की है। इसके लिए कंपनी हरियाणा के खरखौदा में ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित कर रही है। कंपनी ने बताया कि खरखौदा साइट पर निर्माण कार्य योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है और 2.50 लाख यूनिट की वार्षिक क्षमता वाला पहला प्लांट 2025 में चालू होने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा कि एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर खरखौदा सुविधा की क्षमता प्रति वर्ष 1 लाख यूनिट्स होगी।

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संसदीय समिति ने एमएसपी की कानूनी गारंटी की वकालत की

संसद की एक समिति ने सरकार से कृषि उपज के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने की सिफारिश की है। समिति ने तर्क दिया है कि इस तरह के उपाय से किसानों के आत्महत्या के मामलों में काफी कमी आ सकती है और उनकी (किसानों को) वित्तीय स्थिति बेहतर की जा सकती है। कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी की अध्यक्षता वाली कृषि, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण पर संसद की स्थायी समिति ने मंगलवार को कानूनी रूप से गारंटीशुदा एमएसपी के संभावित लाभ पर प्रकाश डालते हुए संसद को एक व्यापक रिपोर्ट सौंपी।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति दृढ़ता से अनुशंसा करती है कि कृषि और किसान कल्याण विभाग जल्द से जल्द कानूनी गारंटी के रूप में एमएसपी को लागू करने के लिए एक रूपरेखा घोषित करे।’’ मौजूदा समय में, सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर 23 उत्पादों के लिए एमएसपी तय करती है। समिति ने तर्क दिया कि कानूनी रूप से बाध्यकारी एमएसपी न केवल किसानों की आजीविका की रक्षा करेगा बल्कि ग्रामीण आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को बढ़ाएगा।

समिति की प्रमुख सिफारिशों में - किसानों की आत्महत्या को कम करने के लिए एक मजबूत एमएसपी प्रणाली को लागू करना, फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा प्रदान करना, खेत मजदूरों को न्यूनतम जीवनयापन मजदूरी के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना करना, किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए ऋण माफी योजना शुरू करना और कृषि विभाग का नाम बदलकर उसमें खेत मजदूरों को शामिल करना है।

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शेयर बाजार से जमकर पैसा जुटा रही कंपनियां, 2024 में बना रिकॉर्ड

भारतीय शेयर बाजार के लिए 2024 एक ऐतिहासिक साल रहा है। कंपनियों ने इस साल अब तक इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ), क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) और राइट्स इश्यू के जरिए 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड पूंजी जुटाई है। इससे पहले 2021 में कंपनियों ने रिकॉर्ड 1.88 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक 90 कंपनियों ने 1.62 लाख करोड़ रुपये की राशि जुटाई है या इसकी घोषणा की है, जो पिछले साल के 49,436 करोड़ रुपये से 2.2 गुणा अधिक है।

2024 में नए इश्यू के जरिए जुटाई गई राशि करीब 70,000 करोड़ रुपये है, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 43,300 करोड़ रुपये था। 2024 में अब तक 88 कंपनियां क्यूआईपी के जरिए 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी हैं। इससे पहले क्यूआईपी के जरिए सबसे अधिक राशि 80,816 करोड़ रुपये 2020 में 25 कंपनियों द्वारा जुटाई गई थी। इस अब तक 20 कंपनियों ने राइट्स इश्यू के जरिए करीब 18,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

पिछले साल यह आंकड़ा 7,266 करोड़ रुपये और 2022 में यह 3,884 करोड़ रुपये था। 2024 के आखिरी दो हफ्तों में भी यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि इस हफ्ते डीएएम कैपिटल एडवाइजर्स, वेंटीव हॉस्पिटैलिटी, कैरारो इंडिया, सेनोरेस फार्मास्युटिकल्स, ट्रांसरेल लाइटिंग, कॉनकॉर्ड एनवायरो सिस्टम्स, सनाथन टेक्सटाइल्स और ममता मशीनरी जैसी कंपनियों का आईपीओ खुला रहा है। जानकारों का कहना है कि कंपनियों द्वारा बड़ी मात्रा में फंड जुटाए जाने की वजह अर्थव्यवस्था की विकास दर तेज होना है। साथ ही यह इक्विटी मार्केट में लोगों के बढ़ते विश्वास को भी दिखाता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 8.2 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2024-25) में विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने के अनुमान है।

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