
धनतेरस से पहले सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है।
23 अक्टूबर को चांदी ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे आ गई।
30 सितंबर के मुकाबले सोना ₹6,258 और चांदी ₹26,020 सस्ती हुई।
गोल्ड ETF, फिजिकल गोल्ड और SGB में निवेश के विकल्प अलग-अलग हैं।
धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह के सीजन में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में आई गिरावट राहत लेकर आई है। चांदी का भाव गिरकर ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे आ गया है, जबकि सोना भी अपने रिकॉर्ड हाई से करीब ₹50,000 तक सस्ता बताया जा रहा है। ऐसे में त्योहारों से पहले खरीदारों की नजर कीमती धातुओं के भाव पर है। भारत में धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है, इसलिए आने वाले दिनों में इनकी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,47,888 प्रति 10 ग्राम था। 23 अक्टूबर को यह घटकर ₹1,41,630 रह गया। इस तरह 24 दिनों में 24 कैरेट सोना ₹6,258 सस्ता हुआ।
इसी अवधि में 22 कैरेट सोने की कीमत भी नीचे आई। 30 सितंबर को इसका भाव ₹1,35,915 प्रति 10 ग्राम था, जो 23 अक्टूबर को घटकर ₹1,29,566 रह गया। यानी 22 कैरेट सोने की कीमत में ₹6,349 की गिरावट दर्ज की गई।
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट आई है। 30 सितंबर को एक किलो चांदी का भाव ₹2,20,435 था, जो 23 अक्टूबर को घटकर ₹1,94,415 रह गया। इस तरह 24 दिनों में चांदी ₹26,020 सस्ती हो गई और इसका भाव ₹2 लाख प्रति किलो के नीचे पहुंच गया।
चांदी के भाव में गिरावट का अंदाजा इसके रिकॉर्ड स्तर से लगाया जा सकता है। 29 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी का वायदा भाव ₹4,20,048 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इसके मुकाबले अब इसकी कीमत करीब 50% नीचे आ चुकी है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को MCX पर चांदी का वायदा भाव ₹2 लाख प्रति किलो से नीचे आ गया।
सोने में भी इस हफ्ते कमजोरी रही। MCX पर सोने के वायदा भाव में करीब 3.50% की गिरावट आई। शुक्रवार को सोना 0.92% यानी ₹1,315 टूटकर करीब ₹1,41,994 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस हफ्ते सोने में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई, जो जून के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन बताया गया है। सोने का पिछला रिकॉर्ड हाई करीब ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम था। इसके मुकाबले सोना करीब ₹50,000 सस्ता बताया जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों का भी सोने की कीमतों पर असर पड़ा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें स्थिर रहने की उम्मीद है, जबकि दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।
ब्याज दरें ऊंची रहने से सोने पर दबाव पड़ सकता है, क्योंकि सोने से ब्याज नहीं मिलता। ऐसे माहौल में निवेशकों की पसंद और बाजार की दिशा के अनुसार सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट के बाद निवेश करने की सोच रहे लोगों के लिए अलग-अलग विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, हर विकल्प की लागत और उपलब्धता अलग है।
गोल्ड ETF: 16 अक्टूबर से कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने अपने गोल्ड ETF फंड ऑफ फंड्स (FoF) में नया पैसा लेना रोक दिया है। हालांकि, स्टॉक एक्सचेंज पर सीधे गोल्ड ETF खरीदने का विकल्प खुला है। पहले से चल रही SIP पर इसका असर नहीं होगा, लेकिन नए निवेश और रजिस्ट्रेशन पर रोक लागू हो सकती है।
फिजिकल गोल्ड: सोने के सिक्के या बार खरीदने पर 3% GST लगता है। ज्वेलरी खरीदने पर मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। दोबारा बेचने पर ये अतिरिक्त खर्च आमतौर पर वापस नहीं मिलते। इसलिए फिजिकल गोल्ड खरीदते समय सिर्फ सोने के भाव को नहीं, बल्कि कुल लागत को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): सरकार ने नए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी करना बंद कर दिया है। हालांकि, पुराने बॉन्ड दूसरे निवेशकों से सेकेंडरी मार्केट में खरीदे जा सकते हैं।
त्योहारों से पहले सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट खरीदारों के लिए अहम है। फिर भी खरीदारी या निवेश का फैसला अपनी जरूरत और उपलब्ध विकल्पों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।
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