
देश में आज से नया इनकम टैक्स कानून लागू हो गया है, जिससे टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने टैक्स की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 1961 के पुराने कानून की जगह Income Tax Act 2025 लागू किया है। इसके साथ ही ITR फाइलिंग, HRA क्लेम, टैक्स ईयर और कई अन्य नियमों में अहम बदलाव प्रभावी हो गए हैं।
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नए कानून के लागू होते ही फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। अब टैक्सपेयर्स को सिर्फ एक ‘Tax Year’ के आधार पर ITR भरना होगा, जिससे पहले होने वाला कंफ्यूजन खत्म करने की कोशिश की गई है।
आईटीआर की डेडलाइन में भी बदलाव लागू हो गया है। ITR-1 और ITR-2 के लिए अंतिम तिथि 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि ITR-3 और ITR-4 की आखिरी तारीख अब 31 अगस्त कर दी गई है।
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मकान किराया भत्ता (HRA) का लाभ जारी रहेगा, लेकिन अब इसके लिए मकान मालिक का PAN और किराए का वैध प्रमाण देना अनिवार्य हो गया है। कुछ मामलों में मकान मालिक की पूरी जानकारी भी देनी होगी।
इसके साथ ही HRA छूट के दायरे को बढ़ाया गया है। अब बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी 50% छूट वाली कैटेगरी में शामिल किया गया है, जबकि नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों के लिए 40% छूट लागू होगी।
पुरानी टैक्स व्यवस्था में बच्चों के भत्तों में भी बड़ा बदलाव हुआ है। एजुकेशन अलाउंस 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह और हॉस्टल अलाउंस 300 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
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नए कानून के लागू होते ही शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों के लिए खर्च बढ़ गया है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी के चलते डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग महंगी हो गई है।
F&O में STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जबकि ऑप्शन प्रीमियम और एक्सरसाइज पर टैक्स 0.15% तक बढ़ गया है।
डिविडेंड पर भी अब स्लैब के बजाय कैपिटल गेन के तहत टैक्स लगाया जाएगा, जिससे कई निवेशकों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। पर्सनल प्रमोटर्स पर करीब 30% और कंपनी प्रमोटर्स पर करीब 22% टैक्स लागू होगा, जबकि रिटेल निवेशकों पर होल्डिंग अवधि के आधार पर STCG या LTCG लागू होगा।
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अब सिर्फ आधार के जरिए पैन कार्ड बनवाना मान्य नहीं होगा, इसके लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी हो गया है। साथ ही 10 लाख रुपये से अधिक नकद जमा, 5 लाख से ज्यादा की गाड़ी खरीद, 1 लाख से अधिक होटल भुगतान और 20 लाख से अधिक संपत्ति लेनदेन पर पैन अनिवार्य कर दिया गया है।
फॉर्म सिस्टम में भी बड़ा बदलाव लागू हुआ है। फॉर्म 16 की जगह फॉर्म 130, फॉर्म 16A की जगह 131 और फॉर्म 26AS की जगह 168 जैसे नए नाम लागू कर दिए गए हैं, हालांकि इनके काम में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले फूड कार्ड पर टैक्स छूट 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है।
इसके अलावा गिफ्ट कार्ड, वाउचर और कूपन की टैक्स-फ्री सीमा को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है, जो पुरानी और नई दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में लागू होगी।
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