अर्थतंत्र

गरीबों को कैश दे सरकार, टैक्स में राहत काफी नहीं, जानें इस आर्थिक पैकेज पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय

पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की हालत लॉकडाउन की वजह से और भी खराब हो गई है। यही कारण है कि मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान करना पड़ा। 

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

पहले से ही खस्ताहाल अर्थव्यवस्था की हालत लॉकडाउन की वजह से और भी खराब हो गई है। यही कारण है कि मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान करना पड़ा। इस पैकेज में से करीब 6 लाख करोड़ रुपए के हिस्से के बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को विस्तार से जानकारी दी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को कर्ज के लिए 3 लाख करोड़ रुपये के पैकेज जारी करने और बिजली कंपनियों में 90,000 करोड़ रुपए डालने जैसे अहम कदमों का वित्त मंत्री ने ऐलान किया है। इस पैकेज को लेकर देश के दिग्गज अर्थशास्त्रियों और एक्सपर्ट्स की राय भी सामने आई है। एक तरफ कई एक्सपर्ट्स ने इसे रोजगार के अवसरों के लिए एक अच्छा उपाय बताया है तो कई जानकारों का कहना है कि गरीबों के हाथों में रकम पहुंचाने की जरूरत है।

Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST

कई आर्थिक जानकारों का कहना है कि सरकार गरीबों के हाथों में पैसा दे। वश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने इस पैकेज को लेकर कहा है कि इससे ज्यादा अहम यह होगा कि हम लॉकडाउन से किस तरह से निकलते हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ टैक्स में राहत देना ही काफी नहीं है। गरीब लोगों को कैश दिया जाना चाहिए। हालांकि इसके चलते महंगाई भी बहुत नहीं बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय में मैं भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत देखता हूं। समस्या लोगों की धारणा भी है, जो ज्यादा खतरा मान रहे हैं। इससे रिकवरी का पूरा प्रॉसेस ही प्रभावित हो सकता है। हमें यह देखना है कि हम कैसे इसे बैलेंस करते हैं।

Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST

वहीं CRISIL रिसर्च की डायरेक्टर ईशा चौधरी ने पैकेज को लेकर कहा, ‘3 लाख करोड़ रुपये की गारंटी के जरिए कैश के संकट में फंसे MSME सेक्टर को लोन तौर पर नकदी मिल सकेगी। हालांकि इससे क्रेडिट कल्चर के खराब होने का भी रिस्क है। बैंकर्स के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है और इस तरह आपात राशि जारी करने से जोखिम बढ़ सकता है।’

Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST

जबकि अर्नेस्ट ऐंड यंग इंडिया के चीफ पॉलिसी एडवाइजर डीके श्रीवास्तव ने बिजनेस टुडे से बातचीत में कहा, ‘यह पैकेज मुख्य तौर पर क्रेडिट गारंटी के प्रावधानों पर आधारित है, जिसका सरकार के खजाने पर कम ही असर होगा। भविष्य में किसी तरह के डिफॉल्ट पर ही इसकी कोई कीमत चुकानी होगी। बिजली कंपनियों के लिए पैकेज की बात करें वहां भी डिफॉल्ट की स्थिति में बोझ राज्य सरकारों को ही वहन करना होगा।’

Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST

लेकिन पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद पनगढ़िया ने इस पैकेज की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि इस पैकेज को एमएसएमई पर फोकस किया गया है, जहां रोजगार के काफी अवसर होते हैं। यह देखना होगा कि सरकार की ओर से अगली किस्त में क्या आता है। बड़े औद्योगिक घरानों को भी मदद की जरूरत है जो उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। सरकार इनके लिए क्या करती है, यह भी आने वाले दिनों में देखना होगा।

Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST

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Published: 14 May 2020, 1:30 PM IST