अर्थतंत्र

अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से टूटा तेल, 80 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट क्रूड, रुपये को भी सहारा

विशेषज्ञों के अनुसार, एक और सकारात्मक संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी में कमी आना है। उनका मानना है कि यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है, क्योंकि रुपया लगातार मजबूत हो रहा है और इसमें आगे और मजबूती आने की संभावना है।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशक और कारोबारी इस संभावना का आकलन कर रहे हैं कि ईरान से जुड़ा संघर्ष समाप्त हो सकता है और होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड लगभग 1 प्रतिशत फिसलकर 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के अंतरिम समझौते से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा, जबकि एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद ईरान को तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी।

इस सप्ताह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के तहत अप्रैल में घोषित युद्धविराम को 60 दिनों के लिए और बढ़ा दिया गया है, ताकि दोनों पक्ष स्थायी शांति समझौते पर बातचीत कर सकें।

समझौते के अनुसार, अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाया गया अपना प्रतिबंध हटाएगा, जबकि तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों और अन्य समुद्री यातायात को गुजरने की अनुमति देगा। अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को हमले शुरू किए जाने के बाद से ईरान ने इस मार्ग को प्रभावी रूप से बाधित कर रखा था।

इस बीच भारतीय रुपया भी मजबूत हुआ। बुधवार को घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे की बढ़त के साथ 94.29 पर कारोबार कर रही थी, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.56 पर बंद हुई थी।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक और सकारात्मक संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी में कमी आना है। उनका मानना है कि यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है, क्योंकि रुपया लगातार मजबूत हो रहा है और इसमें आगे और मजबूती आने की संभावना है।

विशेषज्ञों ने कहा, "ब्रेंट क्रूड में तेज गिरावट के बाद इसका भाव 79 डॉलर के आसपास आ गया है। साथ ही एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट योजना के जरिए भारत में बड़े पैमाने पर पूंजी प्रवाह की उम्मीद है। इससे रुपए में और मजबूती आ सकती है, जो एफआईआई को बिकवाली से और हतोत्साहित करेगी।"

उन्होंने आगे कहा कि रुपए में और मजबूती की संभावना को देखते हुए एफआईआई फिर से खरीदारी शुरू कर सकते हैं। इससे भारतीय शेयर बाजार को मजबूती मिलने और बाजार में स्थिरता बने रहने की संभावना है। 

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