
केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने में बस गिनकर कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। वहीं बीते वर्षों पर अगर एक नजर दौड़ाएं तो जैसे-जैसे बजट का दिन नजदीक आता है, शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है।
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साल 2010 से 2022 के आंकड़े बताते हैं कि बजट से पहले अक्सर बाजार गिरावट के साथ कारोबार करता है। इसकी सबसे बड़ी वजह होती है सरकारी नीतियों में अचानक बदलाव का डर। हालांकि, बजट के बाद बाजार में अक्सर रिकवरी भी देखी जाती है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बजट के बाद वाले हफ्ते में शेयर बाजार में औसतन 1.36 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है।
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बजट से पहले बाजार की कमजोरी की एक वजह ज्यादा उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) भी है। आंकड़ों के मुताबिक, बजट वाले दिन शेयर बाजार में औसतन 2.65 प्रतिशत का इंट्राडे उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
पिछले 15 वर्षों में देखा गया है कि बजट से एक हफ्ते पहले निफ्टी का औसतन रिटर्न 0.52 प्रतिशत नकारात्मक रहा है। इस दौरान निफ्टी केवल 8 बार ही बढ़त के साथ बंद हुआ।
यह ट्रेंड हाल के वर्षों में भी दिखा है। पिछले पांच वर्षों में से चार साल बजट से पहले वाले महीने में निफ्टी गिरावट में रहा, जिसमें जनवरी 2025 की गिरावट भी शामिल है।
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जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च प्रमुख राहुल शर्मा ने कहा कि यूनियन बजट 2026 से उम्मीद है कि सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों जैसे वैश्विक दबावों का भी ध्यान रखा जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस और रेलवे में पूंजीगत खर्च बढ़ाने पर जोर हो सकता है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाया जा सके। डिफेंस बजट बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
उद्योग संगठनों की मांग है कि एमएसएमई, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निर्यात को बढ़ावा दिया जाए और इसके लिए तेज जीएसटी रिफंड और लॉजिस्टिक्स में निवेश जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
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एक्सपर्ट ने आगे बताया कि वित्तीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) के जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही रोजगार सृजन, ग्रामीण मांग और टिकाऊ विकास पर जोर देकर भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि, कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। बजट वाले दिन बाजार में तेज उतार-चढ़ाव रह सकता है। अगर बजट में उम्मीद के मुताबिक राहत नहीं मिली या वित्तीय लक्ष्य बिगड़े, तो बिकवाली बढ़ सकती है, जिससे ब्याज दरें बढ़ने और बाजार में पैसे की कमी हो सकती है।
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इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव, रुपए में उतार-चढ़ाव और वैश्विक व्यापार में रुकावट भी बाजार पर असर डाल सकती है। देश के अंदर नीतियों को लागू करने में देरी होने से भी निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि शेयर बाजार की ऊंची वैल्यूएशन, एफआईआई की बिकवाली और एआई बबल का फटना कुछ ऐसी अतिरिक्त बाधाएं हैं जो इस साल निफ्टी की 29,000 के स्तर की रैली को पटरी से उतार सकती हैं।
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एक्सपर्ट ने निवेशकों को सलाह दी है कि बजट के बाद स्थिति साफ होने तक कुछ नकद पैसा सुरक्षित रखें और डिफेंस और सरकारी बैंकों (पीएसयू बैंक) जैसे चुनिंदा सेक्टर पर ही ध्यान दें।
वहीं, केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 में फिस्कल डेफिसिट जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रहेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में फिस्कल डेफिसिट 4.2 से 4.3 प्रतिशत के बीच रह सकता है। इस दौरान सरकार का कुल उधार 16–17 लाख करोड़ रुपए और शुद्ध उधार 11.5-12 लाख करोड़ रुपए रहने की संभावना है।
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