
उत्तर प्रदेश के कानपुर के बर्रा से करीब एक माह पहले लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का अपहरण फि रौती के लिए उसके दोस्त ने अपने साथियों के साथ मिलकर किया था। उन्होंने यादव की हत्या कर लाश को पांडु नदी में फेंक दिया था। इस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार पी ने बताया कि बर्रा से अपहरण किए गए युवक की 23 जून को गुमशुदगी की शिकायत लिखी गई थी। इसके बाद 26 जून को उसे एफआईआर में तब्दील किया गया। 29 जून को परिजनों के पास फि रौती के लिए कॉल आया था। मामले में सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीमों को मामले में लगाया गया था। लैब टेक्नीशियन संजीत के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्होंने पुलिस की जानकारी में अपहरणकर्ताओं को तीस लाख की फिरौती दी, लेकिन फिर भी उनका बेटा नहीं बचा। जिसके बाद सरकार ने कड़ी कार्रवाई करते हुए एक आईपीएस समेत 11 लोगों को सस्पेंड कर दिया है।
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एक महीने तक इस मामले की तह तक न पहुंच पाने और परिवार द्वारा फिरौती के आरोपों के बाद कानपुर की एएसपी आईपीएस अपर्णा गुप्ता को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा, अपहरण के समय डिप्टी एसपी रहे मनोज गुप्ता, चौकी इंचार्ज राजेश कुमार समेत 5 और पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। 6 सिपाहियों को भी सस्पेंड किया गया है। चौकी इंचार्ज चरणजीत राय पहले ही सस्पेंड हो चुके हैं। एडीजी बीपी जोगदंड पूरे मामले की जांच करेंगे। वह परिवार के उन आरोपों की भी जांच करेंगे, जिसमें परिजनों ने कहा था कि पुलिस के सामने 30 लाख रुपए की फिरौती दी थी। एडीजी को तुरंत कानपुर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
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पुलिस की टीम ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। इसमें दो लोग संजीत के खास दोस्त थे, जिन्होंने संजीत के साथ पहले अन्य पैथोलॉजी में काम किया था। उन्होंने कबूल किया है कि उन्होंने 26 या 27 जून को ही संजीत की हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को पांडू नदी में फेंक दिया था। इस मामले में 4 पुरूषों और एक महिला को गिरफ्तार किया गया है। वहीं शव को बरामद करने के लिए टीमें बनाई गई हैं।
लैब टेक्नीशियन के रिश्तेदार का दावा है कि उन्होंने अपहरणकर्ताओं को 30 लाख रुपये की फिरौती दी है। लेकिन कानपुर रेंज के आईजी मोहित अग्रवाल का कहना है कि अब तक की जांच के अनुसार हमने पाया है कि कोई फिरौती नहीं दी गई है। फिर भी हम सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि कानपुर बर्रा निवासी चमन सिंह यादव के इकलौते बेटा संजीत कुमार का 22 जून की शाम अपहरण हो गया था। दूसरे दिन परिजनों ने पूर्व थाना प्रभारी रणजीत राय को बेटे के लापता होने की बात बताई थी लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं हो पाया।
29 जून की शाम अपहर्ताओं ने पिता को फोन करके 30 लाख की फिरौती मांगी। 13 जुलाई की रात पुलिस ने फिरौती की रकम लेकर परिजनों को भेजा। अपहर्ता गुजैनी पुल से फिरौती की रकम लेकर फरार हो गए और पुलिस देखती रह गई। इस घटना के बाद एसएसपी दिनेश कुमार पी ने इंस्पेक्टर रणजीत राय को निलंबित कर दिया था। वहीं खोज के लिए एसओजी, सर्विलांस टीम और कई थानों की पुलिस लगाई गई थी।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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