
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बीजेपी के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय के उस दावे पर पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि, वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2011 में तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी हासिल कर ली थी और यह स्वीकृति भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद मिली थी।
दरअसल, अमित मालवीय ने दावा किया था कि, वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता हुआ है।
बीजेपी के दावों को खारिज करते हुए जयराम रमेश ने कहा, ‘‘बीजेपी का पूरा तंत्र यह दिखाने में जुटा है कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की बिक्री प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धि है। चार दिसंबर 2011 को तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अक्टूबर 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी प्राप्त कर ली थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी के ‘ट्रोल’, जिनमें उसके कुछ सांसद भी शामिल हैं, उन्हें अपना ‘होमवर्क’ बेहतर ढंग से करना चाहिए।’’
जयराम ने दिसंबर, 2011 की मीडिया रिपोर्ट का ‘स्क्रीनशॉट’ भी साझा किया, जिनमें कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम की बिक्री का रास्ता खोलने की योजना का समर्थन किया था।
इससे पहले मालवीय ने ‘एक्स’ पर कहा था, ‘‘2010 में ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करने का हवाला देते हुए भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता हुआ है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल यूरेनियम का मामला नहीं है। यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ी हुई प्रतिष्ठा को भी दर्शाता है। भारत अब प्रतिबंधों के नजरिये से नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है।’’
रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा था कि कांग्रेस नए आयाम बनाती है, जबकि बीजेपी पलटी मारने में माहिर है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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