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बाबूलाल मरांडी 'आदिम जनजाति' के नाम पर मगरमच्छ के आंसू बहा रहे: सुप्रियो भट्टाचार्य ने हिमंता पर भी साधा निशाना

उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी से मेरा सवाल है कि क्या उन्होंने असम के चाय बगानों में काम करने वाले आदिवासियों के हक के लिए कभी कोई आवाज उठाई? आप केंद्र में मंत्री और सांसद रहे और एक बार फिर से विधायक निर्वाचित हुए हैं।

फोटो- IANS
फोटो- IANS 

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने झारखंड के प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की ओर से राज्य की आदिम जनजाति ‘पहाड़िया’ की स्थिति पर दिए गए बयान को लेकर पलटवार किया है। 

पार्टी के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि बाबूलाल मरांडी आदिम जनजाति के नाम पर सिर्फ मगरमच्छ की तरह आंसू बहा रहे हैं। अगर उन्हें वास्तव में आदिम जनजातियों की चिंता है तो बीजेपी शासित राज्यों ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में जाकर उनकी आर्थिक, सामाजिक स्थिति से अवगत होना चाहिए।

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झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता ने कहा कि मध्य प्रदेश से संबंध रखने वाले शिवराज सिंह चौहान झारखंड के चुनाव में बीजेपी के प्रभारी थे। उनके प्रदेश में कुल 18 आदिम जनजातियां हैं। बाबूलाल मरांडी शायद इन आदिम जनजातियों के नाम भी नहीं जानते होंगे। इसी तरह ओडिशा में 15 और छत्तीसगढ़ में 12 आदिम जनजातियां हैं। इनके बारे में भी मरांडी को कोई जानकारी नहीं होगी। उन्हें हम बता देंगे कि इन प्रदेशों के किन अंचलों में आदिम जनजातियां रहती हैं और किस नाम से उन्हें पुकारा जाता है। वे इन प्रदेशों का दौरा कर उनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति, उनके स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति का झारखंड से तुलनात्मक अध्ययन कर लें, उन्हें वास्तविकता का पता चल जाएगा।

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भट्टाचार्य ने कहा कि असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव प्रचार के दौरान झारखंड के आदिवासियों के बीच धर्म के नाम पर भ्रम फैला रहे थे। उनके प्रदेश के चाय बगानों में काम करने वाले झारखंड के आदिवासियों को आज तक अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है।

 उन्होंने कहा कि बाबूलाल मरांडी से मेरा सवाल है कि क्या उन्होंने असम के चाय बगानों में काम करने वाले आदिवासियों के हक के लिए कभी कोई आवाज उठाई? आप केंद्र में मंत्री और सांसद रहे और एक बार फिर से विधायक निर्वाचित हुए हैं। क्या कभी आपने उनकी कोई चिंता की?

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जेएमएम नेता ने कहा कि झारखंड में शिबू सोरेन की पूर्व की सरकार और इसके बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने ‘पहाड़िया’ जनजाति के लोगों को सरकारी सेवा में सीधी नियुक्ति का नियम लागू किया है। उनके उत्थान और कल्याण के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इस चुनाव में आदिवासियों-मूलवासियों ने हमें भरपूर आशीर्वाद दिया है। उन्होंने बाहर के प्रदेश से आए उन तमाम नेताओं को करारा जवाब दिया, जो आदिवासी बेटे हेमंत सोरेन की सरकार को अपदस्थ करने के लिए यहां आए थे। हमने राज्य की 28 आदिवासी सीटों में से 27 पर जीत दर्ज की है। एक सीट पर हम हारे हैं, लेकिन वहां भी आदिवासी बहुल अंचल में हमें बढ़त हासिल हुई है।

 भट्टाचार्य ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार विकास के मिशन में जुट गई है। राज्य की लाखों महिलाओं के बैंक खाते में इस महीने की 11 तारीख को मंईयां सम्मान के तहत 2,500 रुपए की राशि भेज दी जाएगी।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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