
सीबीआई ने तत्काल टिकट बुकिंग में सेंधमारी करने के आरोप में अजय गर्ग नाम के असिस्टेंट प्रोग्रामर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोग्रामर ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया था, जिसके जरिए रेलवे के तत्काल आरक्षण सिस्टम को ध्वस्त कर एक साथ सैकड़ों टिकटों का आरक्षण किया जाता था। आरोपी संजय गर्ग सीबीआई में ही असिस्टेंट प्रोग्रामर के तौर पर काम करता था। संजय गर्ग ने 2012 में सीबीआई में सहायक प्रोग्रामर के तौर पर अपनी सेवाएं शुरू की थी। इससे पहले वह 2007 से 2011 के बीच आईआरसीटीसी के लिए काम कर चुका है। सीबीआई ने संजय गर्ग के साथ उसके सहयोगी अनिल गुप्ता को भी गिरफ्तार किया है। गर्ग का सहयोगी दलालों को सॉफ्टवेयर बेचा करता था।
अनिल गुप्ता बिटकॉइन, हवाला नेटवर्क और नगदी के तौर पर अजय गर्ग को रकम देता था। इन दोनों के अलावा सीबीआई ने 10 दलालों की पहचान की है, जिनमें से सात जौनपुर और तीन मुंबई के रहने वाले हैं। सीबीआई के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने बताया कि अनिल गुप्ता को उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित उसके घर से गिरफ्तार किया गया है, और उसे ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है।
इस मामले में सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई और जौनपुर समेत 14 जगहों पर छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान इन जगहों से 89.42 लाख रुपये की नकदी, 61.29 लाख रुपये के सोने के गहने, एक किलो की दो सोने की छड़ें, 15 लैपटॉप, 15 हार्ड डिस्क, 52 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, 10 नोटबुक और 6 राउटर बरामद किए गए हैं। सीबीआई ने संज गर्ग और अनिल गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, कंप्यूटर से जुड़े अपराधों, रेलवे टिकटों की खरीद और आपूर्ति के अवैध कारोबार के आरोप में केस दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से कोर्ट ने उन्हें पांच दिनों की सीबीआई हिरासत में भेज दिया।
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