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'ISRO को कमजोर कर रही मोदी सरकार, उपग्रह संबंधी कई संपत्ति निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी', कांग्रेस का आरोप

जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का यह कदम चिंताजनक है क्योंकि इसरो ने पिछले छह दशक में बेहद व्यवस्थित तरीके और कठिन परिश्रम से अपनी क्षमता, दक्षता और विशेषज्ञता विकसित की है।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार अंतरिक्ष कार्यक्रम के निजीकरण की दिशा में आक्रामक रूप से आगे बढ़ रही है और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की भूमिका सीमित की जा रही है।

मोदी सरकार की नियत पर सवाल?

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कुछ खबरों का हवाला देते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि रॉकेट के विकास और निर्माण के क्षेत्र में ISRO की भूमिका को काफी सीमित करने तथा उसकी उपग्रह संबंधी कई संपत्तियां निजी कंपनियों को ट्रांसफर करने की तैयारी की जा रही है। कांग्रेस के इस आरोप पर सरकार की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का यह कदम चिंताजनक है क्योंकि इसरो ने पिछले छह दशक में बेहद व्यवस्थित तरीके और कठिन परिश्रम से अपनी क्षमता, दक्षता और विशेषज्ञता विकसित की है।

जयराम रमेश का मोदी सरकार से सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप को निश्चित रूप से प्रोत्साहन और समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि निजी क्षेत्र के साथ लंबे समय से सफलतापूर्वक साझेदारी करते आ रहे इसरो को कमजोर क्यों किया जा रहा है।’’

उन्होंने कहा कि इसरो ने देश को बेहद गौरवान्वित किया है और ‘‘प्रधानमंत्री भी कई मौकों पर उसकी उपलब्धियों का श्रेय लेते रहे हैं।’’

जयराम रमेश का दावा 

रमेश ने दावा किया कि पिछले कुछ महीनों में इसरो के 100 से 120 महत्वपूर्ण पेशेवरों ने संगठन छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें संगठन की भविष्य की दिशा का संभवतः अंदाजा हो गया है।

कांग्रेस महासचिव ने तमिलनाडु में बन रहे दूसरे अंतरिक्ष केंद्र का उल्लेख करते हुए दावा किया कि करीब 1,000 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रहे इस अंतरिक्ष केंद्र को भी एक निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश स्थित ऐतिहासिक श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के भविष्य को लेकर भी ऐसे माहौल में सवाल उठना स्वाभाविक है।

निजीकरण एजेंडे के पीछे प्रधानमंत्री!

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की तरह अंतरिक्ष कार्यक्रम में भी सरकार के निजीकरण एजेंडे के पीछे प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय का प्रोत्साहन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

रमेश ने जी माधवन नायर का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री से प्रेरित होकर अक्टूबर 2018 में बीजेपी में शामिल होने वाले इसरो के एक पूर्व अध्यक्ष ने भी इसके निजीकरण की नई कवायद को लेकर हाल में गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सवाल किया कि इसरो के पांच अन्य जीवित पूर्व अध्यक्ष इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी बात क्यों नहीं रखते।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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