देश

कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट लाने की मांग की, बोले- कब तक हम लोग अमानवीय...

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए वासनिक ने कहा कि भारत को सामाजिक न्याय की स्थिति पर एक वार्षिक रिपोर्ट को संस्थागत रूप देना चाहिए और उसे आर्थिक सर्वेक्षण या समीक्षा की तरह संसद में रखा जाना चाहिए।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक  

राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्य मुकुल बालकृष्ण वासनिक ने मंगलवार को सरकार से सामाजिक न्याय पर वार्षिक रिपोर्ट लाने और आर्थिक समीक्षा की तरह ही उसे भी संसद में पेश करने की मांग की।

सरकार आम बजट से पहले संसद में आर्थिक समीक्षा पेश करती है।

Published: undefined

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए वासनिक ने कहा कि भारत को सामाजिक न्याय की स्थिति पर एक वार्षिक रिपोर्ट को संस्थागत रूप देना चाहिए और उसे आर्थिक सर्वेक्षण या समीक्षा की तरह संसद में रखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह रिपोर्ट ऐसी होनी चाहिए जो समानता और समावेश के संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए आंकड़ों पर आधारित एक रणनीतिक मार्गदर्शक के रूप में काम करे और संसद के भीतर और बाहर चर्चा के लिए उपलब्ध हो।”

Published: undefined

वासनिक ने कहा कि सामाजिक न्याय पर यह रिपोर्ट मौजूदा कानूनी और नीतिगत ढांचे का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन करे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि वंचित वर्गों के लोगों के जीवन और गरिमा की रक्षा के लिए मौजूद विभिन्न योजनाओं और कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा की जा सके।

वासनिक ने कहा, “अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के साथ-साथ भीड़ द्वारा लोगों की जान लेने (लिंचिंग) की घटनाओं में वृद्धि पर, इस रिपोर्ट में विशेष ध्यान देना चाहिए। कब तक हम लोग अमानवीय परिस्थितियों में नालों या गटर या मेनहोल में उतरकर नालियों की सफाई करने और इस प्रक्रिया में कुछ के मारे जाने के साक्षी बनते रहेंगे? राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में इसके समाधान की जरूरत है।”

Published: undefined

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में बजटीय आवंटन और जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव तथा वंचित वर्गों के सशक्तीकरण की योजनाओं का भी विश्लेषण होना चाहिए।

वासनिक ने कहा कि इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच शिक्षा, रोजगार, औसत आय और गरीबी के स्तर में मौजूद असमानताओं का आकलन करते हुए सामाजिक-आर्थिक अंतर पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आरक्षित श्रेणियों में नियुक्तियों को लेकर अब भी इतना बड़ा बैकलॉग क्यों है और इसे दूर करने के लिए क्या किया जाना चाहिए? वंचित वर्गों से आने वाले बच्चों के शैक्षणिक स्तर में आज भी इतना बड़ा अंतर क्यों है?”

शून्यकाल में ही डीएमके सदस्य केआरएन राजेश कुमार ने राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) को कर छूट देने और अधिक समर्थन उपलब्ध कराने की मांग की।

Published: undefined

उन्होंने कहा कि नाबार्ड भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कृषि, ऋण, ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास तथा देशभर में आय को बनाए रखने में इसकी अहम भूमिका है।

डीएमके सांसद ने कहा कि जिस वित्तीय ढांचे के तहत नाबार्ड काम करता है, वह उसकी भूमिका निभाने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित करता है।

कुमार ने कहा कि नाबार्ड पर आयकर लगाए जाने से उसकी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और संसाधनों की निकासी होती है। उन्होंने कहा, “मैं सरकार से नाबार्ड पर लगाए गए आयकर को हटाने का अनुरोध करता हूं।”

उन्होंने यह भी कहा कि नाबार्ड को अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए अधिक बजटीय समर्थन, अधिक स्वायत्तता के साथ-साथ उसमें प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन में अधिक निवेश की आवश्यकता है।

Published: undefined

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia

Published: undefined