
महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समुदायों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले को रद्द कर दिया है। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने फैसले की निंदा करते हुए कहा कि इस सरकार ने समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के बजाय उन्हें फिर से अंधकार में धकेलने का काम किया है।
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सांसद वर्षा गायकवाड़ ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय और विशेष सहायता विभाग ने 17 फरवरी को एक बहुत गलत फैसला लिया। इस फैसले के साथ ही, मुस्लिम समाज के विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (एसबीसी-ए) में आने वाले व्यक्तियों को जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र देने संबंधी पुराने सभी शासन निर्णय और परिपत्रक आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिए गए हैं। इसका अर्थ है कि मुस्लिम समाज को मिलने वाला आरक्षण रद्द कर दिया गया है।"
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कांग्रेस सांसद ने आगे लिखा, "हम इस फैसले की कड़ी निंदा करते हैं। 2014 में शिक्षा और नौकरी के लिए घोषित 5 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के बजाय, सरकार ने पुरानी प्रक्रियाओं को ही रद्द कर दिया है। सरकार ने हाई कोर्ट के अंतरिम स्टे और अध्यादेश के समाप्त होने का हवाला देकर मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर चोट की है।"
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वर्षा गायकवाड़ ने अपनी पोस्ट में कहा, "क्या एक तरफ 'सबका साथ-सबका विकास' कहना और दूसरी ओर आरक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेज हासिल करने का रास्ता बंद करना दोगलापन नहीं है? भले ही बॉम्बे हाईकोर्ट ने शिक्षा में मुस्लिम समाज के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी, लेकिन इसे आज तक महाराष्ट्र में लागू नहीं किया गया है। कोर्ट की ओर से मंजूर आरक्षण को लागू न करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।"
उन्होंने 'एक्स' पोस्ट के साथ सरकारी आदेश भी शेयर किया और कहा, "समाज के पिछड़े तबकों को मुख्यधारा में लाने के बजाय इस सरकार ने उन्हें वापस अंधेरे में धकेल दिया है।"
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आईएएनएस के इनपुट के साथ
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