
नागरिक अधिकार संगठन ‘जन हस्तक्षेप’ ने सरकार से इस वर्ष की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में हुए प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामले तत्काल वापस लेने और उन्हें वेतन में घोषित बढ़ोतरी का लाभ दिलाने का आग्रह किया है।
संगठन के तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट शुक्रवार को यहां ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया’ में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान जारी की गई। इसी अवसर पर यह मांग की गई।
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वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर अप्रैल में नोएडा, गुरुग्राम और मानेसर के औद्योगिक क्षेत्रों में कारखाना श्रमिकों का प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस दौरान पुलिस के एसयूवी समेत कई वाहनों में आग लगा दी गई थी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था और पथराव की घटनाएं हुई थीं।
‘जन हस्तक्षेप’ के संयोजक विकास बाजपेयी और सह-संयोजक अनिल दुबे ने मांग की कि नोएडा जेल में श्रमिकों के साथ ‘‘दुर्व्यवहार एवं मारपीट’’ के आरोपों की जांच की जाए तथा जब्त किए गए उनके मोबाइल फोन एवं अन्य उपकरण लौटाए जाएं।
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बाजपेयी और दुबे ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि श्रमिक आंदोलन से जुड़े कामगारों के खिलाफ दर्ज सभी मामले तत्काल वापस लिए जाएं और गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को रिहा किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार एक अप्रैल से श्रमिकों को वेतन में घोषित बढ़ोतरी का भुगतान सुनिश्चित करे।
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‘जन हस्तक्षेप’ के तथ्यान्वेषी दल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में श्रमिकों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए निष्कर्ष निकाला कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों को उनकी मांगें तत्काल स्वीकार करनी चाहिए।
संगठन ने कहा कि जीवनयापन के लिए पर्याप्त वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस, अतिरिक्त काम के लिए दोगुना वेतन, वार्षिक बोनस और कार्यस्थलों पर सम्मानजनक व्यवहार समेत श्रमिकों की प्रमुख मांगें लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक अधिकार हैं इसलिए सरकारों को इन्हें लागू करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
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