
पिछले कुछ दिनों से ताजमहल को लेकर लगातार विवादित बयान सामने आ रहे हैं। ऐतिहासिक धरोहर पर लगातार जारी जुबानी हमलों के बीच गुरूवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ताजमहल का दौरा किया और वहां झाड़ू भी लगाई। ठीक उसके एक दिन बाद आरएसएस की इतिहास इकाई, अखिल भारतीय इतिहास संकलन समिति (एबीआईएसएस) ने एक हास्यास्पद मांग की है। एबीआईएसएस ने मांग की है कि ताजमहल में होने वाली जुमे की नमाज (शुक्रवार की नमाज) पर रोक लगा देनी चाहिए।
Published: 27 Oct 2017, 4:13 PM IST
एबीआईएसएस के राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर बालमुकुंद पांडे ने कहा कि ताजमहल एक राष्ट्रीय धरोहर है तो फिर मुसलमानों को इसे धार्मिक स्थल के तौर पर इस्तेमाल करने की इजाजत क्यों दी जाती है। पांडे ने आगे कहा कि ताजमहल के परिसर में नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध होना चाहिए। पांडे ने कहा, ‘अगर ताजमहल में मुसलमानों को नमाज अदा करने की इजाजत दी जाती है तो फिर हिंदुओं को भी शिव चालीसा पढ़ने की इजाजत मिलनी चाहिए।’ गौरतलब है कि दो दिन पहले हिंदू युवा वाहिनी के कुछ सदस्यों ने ताजमहल के बाहर शिव चालीसा पढ़ने की कोशिश की थी।
Published: 27 Oct 2017, 4:13 PM IST
बालमुकुंद पांडे यहीं नहीं रुकते बल्कि आगे कहते हैं, ‘ये बात अब साबित हो चुकी है कि ताजमहल एक शिव मंदिर था, जिसे एक हिंदू राजा ने बनवाया था। ताज मोहब्बत की निशानी नहीं है, क्योंकि शाहजहां ने तो मुमताज की मौत के चार महीने बाद ही शादी कर ली थी।‘ पांडे ने कहा कि वे लोग इस बात के प्रमाण एकत्र कर रहे हैं और जल्द ही सारे सबूतों को लोगों के सामने रखेंगे।
यह स्पष्ट है कि एबीएसएस आरएसएस का सहायक संगठन है जो भारत के इतिहास को अपनी इच्छा के अनुसार भगवा रंग में रंगने और इसे अपने अनुकूल बनाने का इरादा रखता है।
Published: 27 Oct 2017, 4:13 PM IST
जहां तक ताजमहल में नमाज पढ़ने की बात है तो ताजमहल कोई मस्जिद नहीं एक मकबरा है, जहां नमाज अदा नहीं की जाती है। बल्कि नमाज ताजमहल के करीब मौजूद एक मस्जिद में अदा की जाती है, जिसे मस्जिद ए जहां के नाम से जाना जाता है। नमाजियों की संख्या ज्यादा हो जाने और सुरक्षा को देखते हुए शुक्रवार को ताजमहल को बंद रखा जाता है।
Published: 27 Oct 2017, 4:13 PM IST
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Published: 27 Oct 2017, 4:13 PM IST