
बिहार में नीतीश युग का अंत होने वाला है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाना चाहते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर सार्वजनिक रूप से अपनी इस ख्वाहिश को जाहिर किया है।
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नीतीश कुमार ने गुरुवार को अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।"
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उन्होंने आगे लिखा, "संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।"
नीतीश ने कहा, "मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।"
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वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को भारी जीत दिलाने के बाद कुमार के पद छोड़ने से अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के किसी नेता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना है।
यदि ऐसा होता है तो बिहार को पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री मिलेगा। हिंदी भाषी राज्यों में बिहार ही अब तक ऐसा राज्य रहा है जहां बीजेपी का मुख्यमंत्री नहीं रहा है।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीट के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है और बृहस्पतिवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन है।
राज्य विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए कुमार का संसद के उच्च सदन के लिए निर्वाचित होना लगभग तय माना जा रहा है।
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गौरतलब है कि नीतीश कुमार पिछले लगभग 21 साल से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने 2025 में 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वे राज्य के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री भी हैं।
साल 1985 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में वे पहली बार बिहार विधानसभा में पहुंचे थे और 1989 में पहली बार सांसद बने। नीतीश कुमार लगातार साल 1989 से लेकर 2004 तक बाढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव जीतते रहे। पहली बार मार्च 2000 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला। उस समय बहुमत न मिल पाने पर 7 दिन में सरकार गिर गई थी। साल 2001 से 2004 के बीच वे केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे और रेल मंत्रालय संभाला। जीतन राम मांझी के छोटे से कार्यकाल (20 मई 2014 से 20 फरवरी 2015) को छोड़कर नीतीश कुमार 2005 से वे अब तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं।
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