
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना देश को ‘‘पर्यावरणीय आपदा’’ की ओर ले जा रही है और इस परियोजना से जुड़े मुद्दों पर देश की ‘‘इकोलॉजिकल चेतना’’ कठघरे में खड़ी है।
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जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना और जैव-विविधता से समृद्ध इस क्षेत्र के इकोसिस्टम पर इसके ‘‘विनाशकारी प्रभावों’’ को लेकर उनकी सार्वजनिक भागीदारी में व्यापक रुचि दिखाई गई है।
उन्होंने कहा कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट, संसद में किए गए हस्तक्षेपों तथा विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों को लिखे गए पत्रों और उनके जवाबों का एक संकलन तैयार किया गया है।
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कांग्रेस नेता ने 'एक्स' पर पोस्ट कर दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘‘ग्रेट निकोबार में पर्यावरणीय आपदा की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं’’ और आने वाले समय में इस मुद्दे पर उनकी (रमेश) ओर से और भी सार्वजनिक हस्तक्षेप किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जनहित से प्रेरित नागरिकों और विभिन्न नागरिक समाज समूहों द्वारा दायर पांच अलग-अलग याचिकाओं पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है।
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उनके अनुसार, इनमें कैंपबेल बे राष्ट्रीय उद्यान और गलाथिया राष्ट्रीय उद्यान से संबंधित पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचनाओं के कथित उल्लंघन, वनाधिकार अधिनियम, 2006 के कथित उल्लंघन, तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2019 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के कथित उल्लंघन तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 16 फरवरी, 2026 के आदेश को चुनौती देने से जुड़े मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्र की इकोलॉजिकल चेतना आज कठघरे में खड़ी है।"
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