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महाराष्ट्र : फड़णवीस सरकार ने सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन को दिया राज्यमंत्री का दर्जा

मध्यप्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने भी बाबाओं को साधने की शुरुआत की है। उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन को राज्यमंत्री का दर्जा देने का ऐलान किया है। उनके इस कदम को एक तीर से दो निशाने करना कहा जा रहा है।

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए महाराष्ट्री में देवेंद्र फड़णवीस सरकार ने भी सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन आदेश बेंदेकर को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। रोचक तथ्य यह है कि बेंदेकर शिवसेना नेता हैं और उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने पालघर लोकसभा सीट के उपचुनाव में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस का एक कथित ऑडियो क्लिप सार्वजनिक किया था।

महाराष्ट्र के कानून और न्यायिक विभाग ने आदेश बेंदेकर को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने संबंधी आदेश जारी किया है। इस आदेश में उन सभी सुविधाओं के बारे में बताया गया है जो बेंदेकर राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दी जानी हैं। सरकार का यह विभाग मुख्यमंत्री के ही पास है। हालांकि यह दर्जा मिलने के बाद बेंदेकर ने हालांकि साफ किया है कि वे इस पद के एवज कोई भी भत्ता नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि, “मैं कोई भत्ता नहीं लूंगा। मैं सिर्फ लोगों की सेवा करना चाहता हूं। यह दर्जा किसी व्यक्ति को नहीं बल्कि पद को दिया गया है जो कि मंदिर के चेयरमैन का है। और इस समय मैं इस पद पर हूं।”

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गौरतलब है कि बेंदेकर ने जो ऑडियो क्लिप सार्वजनिक किया था उसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस बीजेपी कार्यकर्ताओँ से कह रहे थे कि कुछ भी करना पड़े, बीजेपी को चुनाव जिताना है। इस ऑडियो क्लिप के सार्वजनिक होने पर देवेंद्र फड़णवीस ने सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जताई थी और कहा था कि सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन को ऐसी गंदी हरकत नहीं करनी चाहिए थी।

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गौरतलब है कि महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के उसके गठबंधन सहयोगी शिवसेना के साथ रिश्ते अच्छे नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिद्धिविनायक मंदिर के चेयरमैन को राज्यमंत्री का दर्जा देकर बीजेपी ने शिवसेना को मनाने की शुरुआत की है। साथ ही हिंदू वोट बैंक को साधने का तीर भी चला है।

याद होगा कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने भी पिछले दिनों पांच धार्मिक बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। इनमें कम्प्यूटर बाबा, पंडित योगेंद्र महंत, नर्मानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज और भय्यूजी महाराज शामिल थे। भय्यू महाराज की हाल ही में मृत्यु हो गई। कहा गया कि उन्होंने आत्महत्या की है। कम्प्यूटर बाबा ने राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने से कुछ वक्त पहले पूरे मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के खिलाफ नर्मदा घोटाला यात्रा निकालने का ऐलान किया था। बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने को बीजेपी ने राजनीतिक मकसद के लिए धर्म के इस्तेमाल की संज्ञा दी थी।

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