देश

'एक प्रधानमंत्री ने ‘Gen Z’ को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की', जयराम का SSR को लेकर PM मोदी पर आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ‘‘एक अन्य प्रधानमंत्री’’ ने यह सुनिश्चित किया है कि 2024 के बाद से मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण नहीं हो, ताकि जेन-जी मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में दर्ज न हो सके।"

कांग्रेस नेता जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश 

  • मोदी सरकार पर नई पीढ़ी के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप।

  • जयराम रमेश ने कहा, ‘‘एक प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे (प्रधानमंत्री मोदी) ने उसे छीनने की कोशिश की।’’

  • एक रिपोर्ट के मुताबिक हज़ारों ‘जेन ज़ी’ युवाओं के नाम अभी तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं।

कांग्रेस ने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा है। पार्टी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने वर्ष 2024 के बाद से मतदाता सूचियों के एसएसआर को रोककर नई पीढ़ी के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया को प्रभावित किया है।

जयराम रमेश का पीएम मोदी पर आरोप

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना करते हुए कहा, ‘‘एक प्रधानमंत्री ने जेन-जी को वोट का अधिकार दिया, दूसरे ने उसे छीनने की कोशिश की।’’

उन्होंने कहा कि एक प्रधानमंत्री ने दिसंबर, 1988 में संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान के अनुच्छेद 326 में संशोधन करके मतदान की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी थी।

उनके मुताबिक, यह ऐसा कदम था जिसने युवाओं को सशक्त किया। संविधान (61वां संशोधन) अधिनियम, 1988 के तहत अनुच्छेद 326 में 21 वर्ष की जगह 18 वर्ष की आयु का प्रावधान किया गया था।

जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि ‘‘एक अन्य प्रधानमंत्री’’ ने यह सुनिश्चित किया है कि 2024 के बाद से मतदाता सूचियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण नहीं हो, ताकि जेन-जी मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में दर्ज न हो सके। उन्होंने इसे युवाओं की आकांक्षाओं और उम्मीदों को निराश करने वाला कदम बताया।

बावजूद 2024 से वोटर लिस्ट में शामिल नहीं जेन जी मतदाता

बता दें कि, मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) के सालाना रिव्यू की प्रक्रिया, जिसके ज़रिये 18 साल के युवाओं का नाम लिस्ट में शामिल किया जाता है, में देरी हो रही है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026-27 के लिए इसकी घोषणा मई-जून में होनी थी, मगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों के बीच सहमति न बन पाने के कारण इसमें देरी हुई है।

यह ख़बर ऐसे समय में सामने आई है जब दो दिन पहले ही इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आया था कि चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच कम से कम 14 बार उन फैसलों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए थे।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, आमतौर पर जनवरी में जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट में इस बार बहुत ज़्यादा देरी हो रही है, और हज़ारों ‘जेन ज़ी’ युवाओं के नाम अभी तक वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए गए हैं। अख़बार के मुताबिक, इसके कारण राज्यों में हर साल होने वाले एसएसआर की दशकों पुरानी परंपरा टूट गई, वहीं दोनों आयुक्तों- संधू और जोशी ने इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की पुरज़ोर वकालत और मांग की थी।

पीटीआई के इनपुट के साथ

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए