
राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी (आप) के अन्य सांसदों के बीजेपी में शामिल होने पर विपक्ष के नेता बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का पहले से ही काम लोगों को तोड़ना है, इसमें कुछ नया नहीं हो रहा है।
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कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "वह दिन दूर नहीं जब अरविंद केजरीवाल खुद भी आम आदमी पार्टी के साथ बीजेपी में विलय कर लें। मुझे अरविंद केजरीवाल की एक बात समझ नहीं आती। जब स्वाति मालीवाल और राघव चड्ढा खुले तौर पर उनका विरोध कर रहे थे, तो उन्होंने उन्हें पार्टी से निलंबित या निष्कासित क्यों नहीं किया? उन्हें अब भी पार्टी में क्यों रखा गया था?"
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समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा कहते हैं, "आम आदमी पार्टी एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। हम चाहते हैं कि आप दिल्ली में एक मजबूत विपक्ष बना रहे और पंजाब में 'इंडिया' गठबंधन को मजबूत करे। हमें आम आदमी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं के प्रति सहानुभूति है। यह घटनाक्रम अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम के लिए एक सबक भी है।"
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शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने कहा, "आप के सात राज्यसभा सदस्य, खासकर पंजाब से बीजेपी में शामिल हो गए हैं। बीजेपी जिस तरह की राजनीति कर रही है, उसे हर कोई जानता है। उनकी राजनीति के लिए सिर्फ एक ही शब्द बेशर्मी है, जहां शर्म नाम की कोई चीज नहीं है। कल तक राघव चड्ढा खुलेआम कहते थे कि बीजेपी गुंडों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी है और अचानक, ये सभी लोग थोक के भाव गुंडों और भ्रष्ट लोगों की पार्टी में शामिल हो गए।"
संजय राउत ने कहा, "विपक्ष कभी कमजोर नहीं होगा। जिन 6-7 लोगों ने पार्टी छोड़ी है, वे कोई जानी-मानी हस्तियां नहीं हैं। वे तो सोशल मीडिया के 'पेज-3' वाले नेता हैं। आपने देखा ही होगा कि हमारी पार्टी के एक और सांसद हैं जो पंजाब से हैं और एक संत हैं। वे पर्यावरण के क्षेत्र में काम करते हैं। वे एक संत हैं। वे हमारे राज्यसभा सदस्य हैं। उन पर भी दूसरे सांसदों के साथ मिलकर पार्टी छोड़ने का दबाव डाला गया था, लेकिन उन्होंने पार्टी छोड़ने से साफ इनकार कर दिया।"
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आप नेता अनुराग ढांडा ने कहा, "क्या महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और शहीद भगत सिंह के पास यह विकल्प नहीं था? वे भी अंग्रेजों के साथ समझौता करके शांतिपूर्ण जीवन जी सकते थे लेकिन उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और इसीलिए इतिहास उन्हें याद रखता है। इतिहास कभी गद्दारों को याद नहीं रखता।
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संजय सिंह ने सभापति को एक पत्र लिखा है कि बीजेपी में शामिल हुए इन तीनों लोगों की सदस्यता समाप्त कर दी जानी चाहिए। उन्होंने आप छोड़ दी है। राज्यसभा में बने रहने का उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसलिए उनकी सदस्यता भी रद्द कर दी जाए। पंजाब की जनता भी उन्हें सबक सिखाएगी। देश गद्दारों को उनकी गद्दारी की सजा देगा। आने वाले समय में उन्हें यह बात साफ तौर पर समझ आ जाएगी। गद्दारों के जाने से आप और भी मजबूत होगी।"
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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