
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुये कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रदेश के सामाजिक ताने-बाने को गंभीर क्षति पहुंचने के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसकी मांग पार्टी लंबे समय से कर रही थी।
मणिपुर में बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इससे पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार को पद से इस्तीफा दे दिया था।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "आखिरकार वह हुआ जिसकी मांग भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पिछले 20 महीनों से कर रही थी। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया है।"
रमेश ने दावा किया कि राष्ट्रपति शासन तब लगाया गया है जब उच्चतम न्यायालय ने राज्य में 'संवैधानिक तंत्र के पूर्ण रूप से ठप हो जाने' की बात कही, जिसके चलते तीन मई 2023 से अब तक 300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 60,000 से अधिक पुरुषों, महिलाओं, और बच्चों का विस्थापन हो चुका है।
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कांग्रेस महासचिव ने लिखा कि राष्ट्रपति शासन तब लगाया गया जब मणिपुर के सामाजिक ताने-बाने को गंभीर रूप से क्षति पहुंचने दी गयी।
उन्होंने आगे कहा, "यह तब हुआ है जब फरवरी 2022 में बीजेपी और उसके सहयोगियों को भारी बहुमत मिला, लेकिन उनकी राजनीति ने महज़ पंद्रह महीनों के भीतर इस भयानक त्रासदी को जन्म दिया। यह तब हुआ है जब केंद्रीय गृह मंत्री मणिपुर की स्थिति संभालने में पूरी तरह से विफल रहे, जबकि इस दायित्व को प्रधानमंत्री ने उन्हें सौंपा था।"
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रमेश ने कहा कि यह तब हुआ है जब दुनिया भर में घूमने वाले प्रधानमंत्री, मणिपुर जाने और वहां सुलह प्रक्रिया शुरू करने से लगातार इनकार करते रहे।
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इससे पहले, मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मानना है कि ‘‘ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें इस राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती।’’
अधिसूचना में कहा गया है, ‘‘अब, संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और इस राज्य के राज्यपाल द्वारा निहित या प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों को अपने अधीन करती हूं।’’
पीटीआई के इनपुट के साथ
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