
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जोरदार पलटवार किया है। प्रियंका गांधी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि यह बिल महिला आरक्षण के लिए नहीं बल्कि परिसीमन के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा कि महिला बिल जो 2023 में पास हुआ था उसे लागू किया जाए।
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प्रियंका गांधी ने दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, "केंद्र की एनडीए सरकार की लोकतंत्र को कमजोर करने और संघीय ढांचे को बदलने की साजिश संसद में विफल हो गई। उन्होंने कहा कि कल (शुक्रवार) लोकसभा में जो हुआ वह लोकतंत्र और विपक्षी एकता की बड़ी जीत है।"
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केरल के वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि, "बीजेपी की पूरी साजिश महिला आरक्षण का इस्तेमाल करके स्थायी रूप से सत्ता में बने रहने की थी। हम परिसीमन के मामले में बीजेपी पर भरोसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे ऐसा अपने फायदे के लिए ही करेंगे।"
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प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिल का मसौदा एक दिन पहले क्यों सार्वजनिक किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी महिलाओं के नाम पर सत्ता में रहना चाहती है। महिलाएं बेवकूफ नहीं हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं का मसीहा बनना चाहते हैं ये। मणिपुर में क्या हुआ, उन्नाव में क्या हुआ, कुश्ती की महिला खिलाड़ियों के साथ क्या हुआ। उन सब महिलाओं को कोई पूछने नहीं गया। महिलाओं का मसीहा बनना इतना आसान नहीं है।
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कांग्रेस सांसद ने कहा कि आम लोगों को असली मुद्दे से भटकाने के लिए यह सब किया गया। जनता परेशान है और इस सरकार की हरकतों को भली-भांति समझ चुकी है; जनता अब सरकार के बहकावे में नहीं आएगी। प्रियंका ने कहा कि अगर सरकार 2023 के महिला आरक्षण कानून को लागू करती है तो सभी विपक्षी दल सरकार का समर्थन करेंगे।
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प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष के लिए महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन योजना का समर्थन करना संभव नहीं है; अगर सरकार वाकई गंभीर है तो उसे 2023 के कानून को लागू करना चाहिए।
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लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया था।
सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
सरकार ने इस विधेयक के साथ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
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