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रोडरेज केस: सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 30 साल पुराने मामले में गैर-इरादतन हत्या के आरोप से बरी

साल 1988 में पटियाला में सिद्धू का सड़क पर एक व्यक्ति से झगड़ा हो गया था। उस दौरान दोनों के बीच हाथापाई हुई, जिससे बाद में पीड़ित की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने सिद्धू और उनके एक दोस्त के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट से सिद्धू को बड़ी राहत

कांग्रेस नेता और पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिंद्धू को 3 दशक पुराने रोड रेज मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने सिद्धू को मामूली मारपीट का दोषी मानते हुए सिर्फ एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। सिद्धू और उनके साथी रुपिंदर सिंह संधू पर साल 1988 में सड़क पर एक युवक के साथ मारपीट का आरोप है, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। इस मामले में सिद्धू को हाईकोर्ट से 3 साल की सजा मिली थी, जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अब इस मामले में 30 साल बाद शीर्ष कोर्ट ने उन्हें धारा 304 के आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने उन्हें धारा-323 के तहत मामूली मारपीट का दोषी करार देते हुए एक हजार का जुर्माना लगाया है।

कोर्ट के इस फैसले पर खुशी का इजहार करते हुए सिद्धू ने कहा कि वह पंजाब के लोगों को धन्यवाद देना चाहते हैं, क्योंकि वह उनकी ही दुआओं की बदौलत बरी हुए हैं।

Published: 15 May 2018, 2:00 PM IST

इस मामले में सबूतों का अभाव बताते हुए निचली अदालत ने 1999 में सिद्धू को बरी कर दिया था। उसके बाद पीड़ित पक्ष ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने 2006 में इस मामले में सिद्धू को 3 साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने 18 अप्रैल को सुनवाई के बाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सिद्धू की ओर से दावा किया गया था कि गुरनाम सिंह की मौत का कारण विरोधाभासी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं कर पाई है। सिद्धू ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उन्हें फंसाया गया है।

Published: 15 May 2018, 2:00 PM IST

सिद्धू इस समय पंजाब सरकार में पर्यटन मंत्री हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनमा पक्ष रखते हुए कहा था कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा जाए, जिसमें नवजोत सिंह सिद्धू और उनके साथी को गैर इरादतन हत्या का दोषी मानते हुए 3 साल की सजा सुनाई गई थी।

यह मामला साल 1998 का है, जब सिद्धू का पटियाला में कार से सफर के दौरान स़क पर ही गुरनाम सिंह नाम के एक व्यक्ति से झगड़ा हो गया। आरोप है कि उस दौरान दोनों के बीच हाथापाई हो गई, जिसकी वजह से बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।

Published: 15 May 2018, 2:00 PM IST

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Published: 15 May 2018, 2:00 PM IST