
तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच डीएमके ने बुधवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के साथ सीट बंटवारे का समझौता अंतिम रूप दिया है। इस समझौते के तहत सीपीआई को 5 विधानसभा सीटें दी गई हैं, जो 2021 के चुनाव में लड़ी गई 6 सीटों से एक कम है।
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यह समझौता मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और सीपीआई के राज्य सचिव वीरापांडियन की मौजूदगी में औपचारिक रूप से साइन किया गया। इसे आगामी चुनाव से पहले डीएमके गठबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राज्य में सियासी गतिविधियां तेजी से बढ़ गई हैं। सभी प्रमुख दल अपने-अपने गठबंधन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। गठबंधन का नेतृत्व कर रही डीएमके ने अपने सहयोगी दलों के साथ कई दौर की बातचीत कर रही थी ताकि सीटों का संतुलन बनाया जा सके।
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सूत्रों के मुताबिक सीपीआई ने शुरुआत में पिछली बार के मुकाबले ज्यादा सीटों की मांग की थी। हालांकि, तीन दौर की बातचीत के बाद पार्टी ने गठबंधन की मजबूती और अन्य सहयोगियों को जगह देने की जरूरत को देखते हुए कम सीटों पर सहमति जताई।
समझौते के बाद सीपीआई नेताओं ने कहा कि इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों को हराना है। उन्होंने कहा कि सीटों की संख्या कम होने से कुछ कार्यकर्ताओं को निराशा हो सकती है, लेकिन एकजुट धर्मनिरपेक्ष मोर्चा बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
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एक वरिष्ठ सीपीआई नेता ने कहा, "हमारा फोकस बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन को हराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना है। सीपीआई हमेशा से आम लोगों, मजदूरों और वंचित वर्गों की आवाज उठाती रही है और आगे भी उठाती रहेगी।"
बताया जा रहा है कि डीएमके नेतृत्व ने अपने सहयोगियों से गठबंधन के विस्तार के कारण कम सीटों पर सहमत होने का आग्रह किया था। सीपीआई का 5 सीटों पर समझौता करना एक रणनीतिक फैसला माना जा रहा है, ताकि गठबंधन एकजुट बना रहे।
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वहीं, सीपीआई (एम) के साथ अभी बातचीत जारी है। बताया जा रहा है कि सीपीआई (एम) ने भी 2021 के मुकाबले ज्यादा सीटों की मांग की है और इस पर चर्चा आगे भी जारी रहेगी।
गठबंधन के तहत कांग्रेस को करीब 28 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि एमडीएमके, आईयूएमएल और मनिथनेया मक्कल कच्ची (एमएमके) जैसे अन्य सहयोगी दलों को कम सीटें मिल सकती हैं।
सीपीआई के साथ समझौता होने के बाद डीएमके अब अपने सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गई है, जिससे 23 अप्रैल को एक चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संयुक्त और संगठित अभियान का रास्ता साफ हो गया है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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