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'अच्छे दिन' का सपना दिखाने वाली सरकार अब जनता से मांग रही त्याग, पीएम की बचत अपील पर विपक्ष का तंज

विजय वडेट्टीवार ने कहा कि 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान भी भारत मजबूत बना रहा था, लेकिन अब 'सुपर पावर' बनने के नाम पर जनता से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, सोना न खरीदने और खाने के तेल का उपयोग घटाने की बात कही जा रही है।

(फोटो : पीटीआई)
(फोटो : पीटीआई)  

वैश्विक संकट और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से मितव्ययिता अपनाने, ईंधन बचाने और गैर-जरूरी खर्चों से बचने की सलाह पर महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही अचानक त्याग और सादगी की बातें याद आने लगती हैं।

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महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक 'त्याग' याद आने लगा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "प्रधानमंत्री सिर्फ सलाह देते हैं, लेकिन उसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ता है।"

विजय वडेट्टीवार ने कहा कि 2008 की वैश्विक मंदी के दौरान भी भारत मजबूत बना रहा था, लेकिन अब 'सुपर पावर' बनने के नाम पर जनता से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, सोना न खरीदने और खाने के तेल का उपयोग घटाने की बात कही जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 में 'अच्छे दिन' का सपना दिखाकर सत्ता में आने वाली सरकार अब जनता से त्याग की मांग कर रही है।

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वहीं एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि प्रधानमंत्री की मितव्ययिता वाली सलाह सही हो सकती है, लेकिन इसकी शुरुआत पहले केंद्र सरकार और बीजेपी शासित राज्यों को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद अब यह नहीं कहा जा सकता कि चुनावों में पानी की तरह पैसा मत बहाइए, बड़े ठेकेदारों से सांठगांठ मत कीजिए, भ्रष्टाचार मत कीजिए और फिजूलखर्ची से बचिए।

रोहित पवार ने कहा कि सबसे पहले बीजेपी शासित राज्यों और खासकर महाराष्ट्र सरकार को लंबे काफिलों, अनावश्यक खर्चों और विदेश दौरों पर रोक लगानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री की यह अपील भविष्य में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने का संकेत है?

उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार सभी दलों को विश्वास में लेकर विदेश नीति तय करती, तो देश को इस तरह की मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता। रोहित पवार ने आरोप लगाया कि गलत विदेश नीति की वजह से देश संकट में फंस रहा है।

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पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि नेताओं और मंत्रियों के लंबे काफिलों पर रोक लगाई जानी चाहिए, एक साल तक बड़ी चुनावी रैलियां बंद होनी चाहिए और भव्य शपथ ग्रहण समारोहों पर भी रोक लगनी चाहिए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 12 मई को असम के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम है, उम्मीद करती हूं वहीं से 'डब्ल्यूएचएफ' (वॉच फ्रॉम होम) की शुरुआत होगी।

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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि क्या हर त्याग सिर्फ आम लोगों को ही करना होगा और प्रधानमंत्री सिर्फ कैमरे के सामने भाषण देते रहेंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के दूसरे देश जहां संभावित संकटों की तैयारी कर रहे थे, वहीं मोदी सरकार चुनाव, विज्ञापन, धार्मिक ध्रुवीकरण और नफरत की राजनीति में व्यस्त थी।

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार सरकार को चेतावनी देते रहे, लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार ने देश को संकट की ओर धकेल दिया। उन्होंने कहा कि अब जब अर्थव्यवस्था दबाव में है, तो जनता को मितव्ययिता का पाठ पढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि देश को दूरदर्शी नेता की जरूरत थी, लेकिन उसे सिर्फ 'इवेंट मैनेजर' मिला।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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