
विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से राज्यसभा में खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के संबंध में दिए गए बयान के बाद विपक्षी नेताओं ने सोमवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट पर केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया की आलोचना की।
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कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने कहा, "ये लोग मुद्दे को भटका रहे हैं। हमने दोनों सदनों में चर्चा के लिए प्रस्ताव दिया है। विदेश नीति विफल हो रही है। जिस प्रकार ट्रंप के बयान आ रहे हैं, हमारी सरकार का क्या रुख है। भारत के बहुत सारे लोग विदेशों में फंसे हैं। 55 प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ भारत में बाहर से आते हैं, उसका क्या समाधान निकाला जा रहा है। किसके दबाव में आप इस तरह के बस छोटे-छोटे बयान दे रहे हैं या बचने की कोशिश कर रहे हैं।"
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शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने विदेश मंत्री जयशंकर के लोकसभा में दिए बयान पर कहा, "जहां विपक्ष सवाल-जवाब नहीं कर सकता, वह विदेश नीति खोखली है। आज अगर आप संसद में आकर बयान देते हैं तो आपको विपक्ष के सवालों का जवाब भी देना चाहिए। आप कोई भी सवाल नहीं ले रहे हैं इसलिए विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया। मैं कहना चाहूंगी कि जो बयान एकतरफा हो, जिसमें सवाल न लिए जाएं और विपक्ष की बात न सुनी जाए, वह बयान नहीं बल्कि वह बचाव है।"
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कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने कहा कि वैश्विक स्थिति, विशेष रूप से मध्य पूर्व में, बेहद तनावपूर्ण है और संसद में इस पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "दुनिया, खासकर मध्य पूर्व क्षेत्र बेहद तनावपूर्ण स्थिति का सामना कर रहा है। तेल संकट और ऊर्जा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर भारत में भी दिख रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी गिर रहे हैं, जिससे शेयर बाजार पर असर पड़ रहा है। सत्र में इन मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा और विचार-विमर्श होना चाहिए। किसी मंत्री के लिए ऐसे महत्वपूर्ण मामलों पर सिर्फ बयान देना काफी नहीं है।"
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बता दें कि भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में भारी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं। ताजा हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने का ऑपरेशन जारी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और वहां काम करते हैं, इसलिए यह लड़ाई भारत के लिए खास चिंता की बात है।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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