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‘योगी राज’ में उर्दू अकादमी का कमाल, अपने ही अध्यक्ष और सदस्य को दिया अवॉर्ड, फजीहत होने पर सरकार ने किया रद्द

उत्तर प्रदेश में उर्दू की बेहतरी के लिए काम करने वालों को सम्मानित करने के नाम पर यूपी उर्दू अकादमी ने अपने ही अध्यक्ष और बोर्ड सदस्य को अवार्ड दे दिया। मामले पर फजीहत होने के बाद सरकार ने पुरस्कार वितरण पर रोक लगा दी है।

फोटोः gettyimages
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बीजेपी की योगी सरकार में आए दिन नये-नये कारनामे सामने आते रहे हैं। इस दौड़ में कोई भी मंत्रालय या विभाग पीछे नहीं रहना चाहता। अब सबसे आगे निकलने की होड़ में उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी सुर्खियों में आ गया है। मामला उर्दू की बेहतरी के लिए काम करने वालों के सम्मान समारोह का है। सम्मानित किए जाने वालों की सूची किसी के गले नहीं उतर रही है। दरअसल इस बार यूपी उर्दू अकादमी ने ने अपने ही अध्यक्ष और बोर्ड सदस्य को अवॉर्ड दे दिया है।

इस साल यूपी उर्दू अकादमी के सम्मान समारोह में उर्दू की बेहतरी के लिए काम करने वालों को सम्मानित करने के नाम पर 186 अवॉर्ड देने का फैसला लिया गया। लेकिन सम्मान पाने वालों की लिस्ट देखकर लोग तब हैरत में रह गए जब लिस्ट में 3 महत्वपूर्ण अवॉर्ड अकादमी के ही सदस्यों को दे दिए गए। इसमें खुद उर्दू अकादमी की अध्यक्ष आसिफा जमानी का नाम भी शामिल है। उनके अलावा लिस्ट में दो अन्य सदस्यों के नाम भी शामिल हैं।

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मामला उजागर होने के बाद फजीहत होता देख योगी सरकार ने उर्दू अकादमी के पुरस्कार वितरण पर रोक लगा दी है। साथ ही राज्य के प्रमुख सचिव ने अकादमी के सचिव को नोटिस जारी कर इस मामले में 3 दिन में जवाब मांगा है। उर्दू अकादमी की लिस्ट के अनुसार पुरस्कार वितरण समारोह में अकादमी के

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चेयरमैन को एक लाख और दो सदस्यों को डेढ़ लाख रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया जाना था। उर्दू अकादमी के प्रमुख आसिफा जमानी को डॉ. सुगमा मेहंदी अवॉर्ड दिया जाना था, जिसके तहत एक लाख की राशि मिलती है। वहीं अकादमी के दो अन्य सदस्य प्रो. अब्बास रजा नैय्यर को आमिर खुसरो अवॉर्ड और प्रो आफताब अहमद को प्रो मुहम्मद हसन सम्मान दिया जाना था, जिसके तहत दोनों को डेढ़ लाख की राशि मिलती सम्मान स्वरुप दी जानी थी।

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इस मामले के उजागर होने के बाद योगी सरकार की कार्रवाई की जानकारी देते हुए राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि उर्दू अकादमी के सभी अवार्ड रद्द कर दिए गए हैं और तीन दिन में सचिव से जवाब मांगा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले की जांच करेगी। मोहसिन रजा ने हालांकि एक तरह से बचाव करते हुए कहा कि उर्दू अकादमी के पुरस्कारों के चयन के लिए गठित बोर्ड में जिम्मेदार लोग थे। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कैसे इन लोगों ने खुद को ही पुरस्कार दे दिया।

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