
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ‘एआई शिखर सम्मेलन’ के दौरान कमीज उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार युवा कांग्रेस के नौ कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी।
कोर्ट ने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन प्रतीकात्मक रूप से राजनीतिक आलोचना था और मुकदमे की सुनवाई से पहले हिरासत में रखा जाना ‘‘अवैध तरीके से पहले ही सजा दिए जाने’’ के समान होगा।
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इस पर यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा कि असहमति व्यक्त करना एक मूलभूत अधिकार है, कोई देशद्रोह नहीं। यूथ कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर पीएम मोदी और देश की मीडिया से भी सवाल किया है।
यूथ कांग्रेस ने सोमवार को एक्स पर अपने पोस्ट में पूछा, “अब सवाल ये है कि भारत विरोधी ट्रेड डील पर सवालों से बचने के लिए करीब 1 हफते तक राष्ट्रीय शर्म और नंगई का ढोल पीटने वाले Compromised PM क्या देश से माफ़ी माँगेंगे?”
यूथ कांग्रेस ने आगे लिखा, “क्या कई दिनों तक 24 x 7 PMO (प्रधानमंत्री कार्यालय) से आई पर्चियों पर देशविरोधी का नैरेटिव गढ़ने वाली मीडिया अदालत के इस आदेश को ख़बरों में जगह देगी?”
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बता दें कि, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि ने रविवार को नौ आरोपियों - कृष्ण हरि, नरसिम्हा यादव, कुंदन कुमार यादव, अजय कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह यादव, राजा गुर्जर, अजय कुमार विमल उर्फ बंटू, सौरभ सिंह और अरबाज खान की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा, ‘‘यह विरोध प्रदर्शन एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ज्यादा से ज्यादा एक प्रतीकात्मक राजनीतिक आलोचना का रूप था: नेतृत्व की तस्वीर वाली कमीज, सांप्रदायिक या क्षेत्रीय रंग से रहित गैर-भड़काऊ नारे और अस्थायी सभा थी। कोई सबूत यह नहीं बताते कि किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, या प्रतिनिधियों में डर फैलाया गया; लोग सुरक्षित बाहर निकले।”
इसने कहा कि बगैर जरूरी कारण मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से पहले ही हिरासत में रखा जाना दोषसिद्धि से पहले ही अवैध तरीके से सजा देने के बराबर हो सकता है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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