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'5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक चट्टान...', भूकंप से नहीं, ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़', नेपाल के महाप्रलय की Inside Story

USGS ने कहा, ‘‘यूएसजीएस ने निष्कर्ष निकाला कि कंपन की यह घटना ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुई, जिसके बाद निचले इलाकों की ओर विनाशकारी प्रभाव देखने को मिले।’’

'भूकंप से नहीं, ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़', नेपाल के महाप्रलय की Inside Story
'भूकंप से नहीं, ग्लेशियर टूटने से अचानक आई बाढ़', नेपाल के महाप्रलय की Inside Story  फोटो: IANS

नेपाल में हिमस्खलन की वजह से अचानक बाढ़ आई थी। जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ अमेरिका (USGS) ने कहा है कि ग्लेशियर टूटने की वजह से यह तबाही आई, भूकंप की वजह से नहीं।USGS ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली भूकंपीय तरंगों के अतिरिक्त एनालिसिस से पता चला है कि ये झटके ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहाव से आए थे।

USGS ने अपने ताजा बयान में क्या कहा?

यूएसजीएस ने घटना से संबंधित अपने बयान में कहा, ‘‘शुरुआत में इस घटना को 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया गया था। आसपास के भूकंपीय स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों, लंबी अवधि वाली भूकंपीय तरंगों और उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के अतिरिक्त विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकला कि यह कंपन ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुआ था तथा कोई भूकंप नहीं आया था।’’

उसने कहा, ‘‘यूएसजीएस ने निष्कर्ष निकाला कि कंपन की यह घटना ग्लेशियर के ढहने और मलबे के बहाव के कारण हुई, जिसके बाद निचले इलाकों की ओर विनाशकारी प्रभाव देखने को मिले।’’

विशेषज्ञों की राय 

कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलगरी में भू-आकृति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डेनियल शुगर ने कहा कि बाढ़ 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक चट्टान से ग्लेशियर के खिसककर नीचे गिरने के कारण आई।

शुगर ने प्राकृतिक आपदा से एक दिन पहले यानी मंगलवार और बुधवार को क्षेत्र की ली गई उपग्रह तस्वीरों की तुलना की। ‘न्यू साइंटिस्ट’ पत्रिका ने शुगर के हवाले से कहा, ‘‘उपग्रह तस्वीरों की तुलना करने पर ऐसा लगता है कि आसपास के ग्लेशियरों में पिछले 24 घंटों के दौरान काफी बर्फ पिघली है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा अनुमान है कि बर्फ और ग्लेशियर की बर्फ के पिघलने से ग्लेशियर में काफी मात्रा में पानी हो गया। यह पानी नीचे रिसकर ग्लेशियर की सतह तक पहुंचा और उसे चिकना कर दिया। यही ग्लेशियर के ढहने के लिए पर्याप्त वजह थी।’’

आईसीआईएमओडी ने घटना को लेकर क्या कहा?

वहीं, अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) के विशेषज्ञों ने भी तिब्बत से मध्य नेपाल के जिलों में तबाही मचाने वाली अचानक आई बाढ़ का कारण हिमस्खलन बताया है।

आईसीआईएमओडी ने इस आपदा को हिममंडल से जुड़ी घटनाओं की बढ़ती फ्रीक्वेंसी का उदाहरण बताते हुए शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उसने कहा कि सीमा पार होने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए सरकारों को समन्वित तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

काठमांडू स्थित आईसीआईएमओडी और नेपाल तथा चीन के सहयोगी संस्थानों के वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि क्या यह बाढ़ किसी ऊंचाई वाले क्षेत्र से शुरू हुए हिमस्खलन के कारण आई थी।

ICIMOD का अनुमान 

आईसीआईएमओडी ने एक बयान में कहा कि प्रभावित क्षेत्रों से प्राप्त वीडियो फुटेज और जानकारी के आधार पर किए गए प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि शायद बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानी मलबा भोटे कोशी नदी की सहायक नदी लेंदे खोला में गिरा होगा।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इससे अचानक पानी का तेज बहाव पैदा हुआ होगा, जो अपने साथ मलबा और बड़े पत्थर नीचे की ओर ले गया। आईसीआईएमओडी ने कहा कि जल विज्ञान संबंधी आंकड़ों से बाढ़ की लहर की असाधारण गति और तीव्रता का पता चलता है। त्रिशूली नदी में गलछी के पास जलस्तर कथित तौर पर 30 मिनट में नौ मीटर तक बढ़ गया, जबकि मालेखु में इसी अवधि में जलस्तर सात मीटर बढ़ा।

उसने कहा कि त्रिशूली नदी के किनारे जल निगरानी के कई केंद्र इस घटना के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए या बह गए, हालांकि गलछी निगरानी केंद्र अब भी काम कर रहा है।

विशेषज्ञ यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या मलबे ने नदी के किसी संकरे हिस्से को अस्थायी रूप से रोक दिया था। आईसीआईएमओडी के अनुसार, इस तरह की रुकावट से बांध में जमा पानी अचानक निकलने पर दूसरी आपदाओं का खतरा पैदा हो सकता है।

165 लोगों की मौत, 750 से ज्यादा लापता 

बुधवार को तिब्बत में अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों में भारी तबाही मचाई। इसमें 165 लोगों की मौत हो गई, जबकि 750 लोग लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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