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ईरान का बड़ा पलटवार! बहरीन-कुवैत-जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा, होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का ऐलान

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा किया है। होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव एक बार फिर खुली सैन्य भिड़ंत की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को भी निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है। इन घटनाओं के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट को “अगले आदेश तक” बंद कर दिया गया है।

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18 सैन्य संपत्तियां तबाह करने की बात

IRGC के अनुसार, गुरुवार तड़के कुवैत के अली अल सलेम और अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर ड्रोन हमले किए गए। इसके अलावा बहरीन स्थित शेख ईसा एयरबेस को भी निशाना बनाया गया। ईरानी संगठन का दावा है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के भीतर किए गए ताजा सैन्य हमलों के जवाब में की गई है। IRGC ने दावा किया कि अमेरिका की 18 प्रमुख सैन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है।

ईरान ने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से “अवैध रूप से” गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों पर हमला किया गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि अब इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाला हर प्रकार का समुद्री यातायात प्रभावित होगा। ईरानी सेना ने अमेरिका पर अप्रैल में हुए युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में यह कार्रवाई की गई है।

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फिफ्थ फ्लीट के सिस्टम और जॉर्डन के एयरबेस भी निशाने पर

IRGC का दावा है कि ड्रोन हमलों की इस लहर में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट से जुड़े पैट्रियट सिस्टम के कम्युनिकेशन एंटीना और रडार इंस्टॉलेशन को भी निशाना बनाया गया। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस और मुवाफ्फाक सल्ती एयर बेस पर जोरदार विस्फोट होने की खबर दी है। ये दोनों ठिकाने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों और अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

हालांकि इन विस्फोटों के कारणों और संभावित नुकसान को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इससे पहले बुधवार को भी ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और जॉर्डन के अज्राक एयर बेस को निशाना बनाने का दावा किया था।

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ईरान में कई स्थानों पर धमाकों की खबर

दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए गए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की “लगातार और अनुचित आक्रामकता” के जवाब में की गई है।

ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद केशम द्वीप, बंदर अब्बास, सीरिक और करगान समेत कई इलाकों में जोरदार विस्फोट हुए। दक्षिणी शहर करगान में हुए धमाकों में कम से कम दो लोगों के घायल होने की खबर है। इससे एक दिन पहले अमेरिका ने केशम द्वीप, सीरिक, जास्क और बंदर अब्बास के आसपास मौजूद सैन्य ठिकानों, रडार प्रणालियों और सर्विलांस सिस्टम को निशाना बनाया था।

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हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद बढ़ा तनाव

मौजूदा तनाव की पृष्ठभूमि में वह घटना भी शामिल है जिसमें होर्मुज स्ट्रेट के ऊपर एक अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर मार गिराया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर शांति वार्ता को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर “बहुत कड़ा प्रहार” करेगा। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पलटवार करते हुए कहा कि उनका देश किसी भी दबाव या धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

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