
अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई हाई-लेवल शांति वार्ता से पश्चिम एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आता दिख रहा है। करीब 18 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद ईरान ने बातचीत की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करते हुए दावा किया है कि दोनों पक्षों के बीच पुराने वादों को लागू करने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। इतना ही नहीं, अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए विस्तृत रोडमैप पर भी सहमति बनी है।
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बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समुद्री सुरक्षा रहा। रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक नए तंत्र के निर्माण पर सहमति जताई है। यह व्यवस्था समुद्री व्यापार, सुरक्षा और निगरानी से जुड़े मामलों पर नजर रखेगी। क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक व्यापार के लिहाज से इस सहमति को बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
बातचीत के दौरान होर्मुज से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए एक डायरेक्ट कम्युनिकेशन सिस्टम चालू रखने का भी फैसला किया गया। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाए रखना और दोनों पक्षों के बीच संवाद को लगातार जारी रखना है।
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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बातचीत के बाद कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के प्रयासों से युद्ध समाप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव हुई है। उनके मुताबिक, समझौते के तहत ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी पाबंदियों में राहत, समुद्री नाकेबंदी समाप्त करने और फ्रीज किए गए कुछ वित्तीय संसाधनों को जारी करने पर सहमति बनी है।
हालांकि अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया की पहली वास्तविक परीक्षा लेबनान में बनाई गई संघर्ष-निरोधक व्यवस्था होगी। यह तंत्र सीजफायर उल्लंघन से जुड़े मामलों की निगरानी करेगा। उनका मानना है कि लेबनान में स्थिरता बनाए रखना आगे की कूटनीतिक प्रक्रिया में दोनों पक्षों के बीच विश्वास निर्माण के लिए बेहद अहम होगा।
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बातचीत से जुड़ा एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि दोनों देश अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर मुहर लगाने की दिशा में आगे बढ़ने को तैयार हैं। इसके लिए एक औपचारिक रोडमैप को मंजूरी दी गई है। साथ ही एक हाई-लेवल कमेटी और विशेष वर्किंग ग्रुप्स गठित करने पर भी सहमति बनी है, जो सीधे परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों से जुड़े विषयों पर काम करेंगे।
हालांकि वार्ता के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सार्वजनिक धमकियों को लेकर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और इसे शुरुआती नियमों का उल्लंघन बताया। इसके बावजूद दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर सहमत रहे, जिससे संवाद की प्रक्रिया बाधित नहीं हुई।
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इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों देशों ने संयुक्त रूप से कहा कि वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई। साथ ही एक संयुक्त दस्तावेज जारी करने की भी तैयारी है, जिसमें उन सभी प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख होगा जिन पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी है।
राजनीतिक स्तर पर प्रतिनिधिमंडलों का मुख्य काम पूरा हो चुका है, लेकिन तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी रहेगी। विभिन्न प्रावधानों को लागू करने, समयसीमा तय करने और अन्य व्यावहारिक पहलुओं पर दोनों पक्षों की टीमें काम करती रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील मुद्दों के कारण अंतिम समझौते में समय लग सकता है, लेकिन इस बैठक ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का एक मजबूत और सक्रिय चैनल स्थापित कर दिया है।
रविवार को शुरू हुई इस हाई-लेवल बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया। वहीं ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ मौजूद रहे। मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी स्विट्जरलैंड पहुंचे थे।
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