
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी जारी है। इस बीच अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो शिपिंग कंपनियां ईरान को सुरक्षित रास्ता देने के बदले भुगतान करेंगी, उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इस सख्ती से वैश्विक व्यापार और तेल बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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अमेरिकी ट्रेजरी के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) ने कहा है कि अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए ईरानी सरकारी संस्थाओं को भुगतान करना प्रतिबंधित है। साथ ही गैर-अमेरिकी कंपनियां भी अगर ऐसा करती हैं, तो वे प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। ओएफएसी के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों से जुड़े समुद्री उद्योग के प्रतिभागियों को कई प्रकार के प्रतिबंधों का बड़ा जोखिम है।
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यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव पर असंतोष जताया है। इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच गतिरोध फिलहाल खत्म होने वाला नहीं है। अमेरिका ने दोहराया है कि जब तक ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने वाला समझौता नहीं होता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
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8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद भले ही सीधी लड़ाई रुकी हो, लेकिन कई मुद्दों पर मतभेद कायम हैं। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण प्रमुख हैं। युद्ध के बाद ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर रखी है।
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पिछले महीने ईरानी संसद के उपाध्यक्ष हामिद-रेजा हाजी बाबाएई ने बताया था कि देश ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना शुरू कर दिया है और इससे मिली पहली आय केंद्रीय बैंक में जमा की गई है। ओएफएसी के अनुसार, यह भुगतान नकद के अलावा डिजिटल माध्यमों, समायोजन, अनौपचारिक सौदों या अन्य तरीकों से भी हो सकते हैं, जिनमें चैरिटी दान या दूतावासों के जरिए भुगतान भी शामिल है।
सीजफायर से पहले ईरान ने संकेत दिया था कि इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति सिर्फ मित्र देशों को दी जाएगी और इस पर टोल भी लगाया जा सकता है। यह मार्ग तेल, खाद्य सामग्री, दवाइयों और तकनीकी सामान की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
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