
बांग्लादेश में नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान 17 फरवरी की शाम को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके साथ नई कैबिनेट भी शपथ ग्रहण करेगी। इस समारोह को साधारण औपचारिकता के बजाय एक बड़े कूटनीतिक मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है।
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अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के सरकार प्रमुखों को समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा है। आमंत्रित देशों में भारत, चीन, सऊदी अरब, पाकिस्तान, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, मलेशिया, ब्रुनेई, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और भूटान शामिल हैं।
दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के देशों को एक साथ बुलाना इस आयोजन को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा है। खासतौर पर भारत और चीन दोनों को न्योता भेजना क्षेत्रीय संतुलन की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार, यह नई सरकार की विदेश नीति की प्राथमिकताओं का संकेत है।
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हालिया आम चुनाव में BNP ने 299 में से 209 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, जमात गठबंधन को 68 सीटें मिलीं। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया और अब शपथ ग्रहण की तैयारियां अंतिम चरण में हैं।
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60 साल के तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रभावशाली जिया परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जियाउर रहमान सेना प्रमुख से राष्ट्रपति बने थे। वे बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और 1978 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की स्थापना की थी। 1981 में सैन्य तख्तापलट के दौरान उनकी हत्या कर दी गई थी।
उनकी मां खालिदा जिया देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। वह, 1991 से 1996 तक प्रधानमंत्री पद पर रहीं। उनके निधन के कुछ ही हफ्ते बाद तारिक रहमान को BNP का प्रमुख बनाया गया। इसके बाद हुए चुनाव में पार्टी को बहुमत मिला।
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तारिक रहमान का राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। किशोरावस्था में पिता की हत्या, लंबे समय तक देश से बाहर रहना और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा लगाए गए भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के आरोप, इन सबके बीच उन्होंने अपनी राजनीतिक जमीन बनाई।
उन्होंने 2001 में, करीब 35 वर्ष की उम्र में, BNP में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की थी। धीरे-धीरे संगठन के भीतर उनकी पकड़ मजबूत हुई और अंततः वे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचे।
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प्रधानमंत्री पद संभालते ही तारिक रहमान के सामने कई अहम चुनौतियां होंगी। घरेलू राजनीतिक स्थिरता कायम रखना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के बीच संतुलित संबंध बनाए रखना उनकी प्राथमिक प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
ढाका में होने वाला शपथ समारोह इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसे नई सरकार के अंतरराष्ट्रीय संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के देशों की मौजूदगी यह संकेत दे सकती है कि बांग्लादेश आने वाले समय में संतुलित और बहुध्रुवीय कूटनीति की राह पर आगे बढ़ेगा।
17 फरवरी की शाम का यह आयोजन बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक होगा, जहां घरेलू अपेक्षाओं और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच नई सरकार अपनी दिशा तय करेगी।
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