
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अपने एयरबेस पर ईरानी मिलिट्री जेट्स को रुकने की अनुमति दी है।
खबर है कि अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए अपने हवाई अड्डों में जगह दी थी। ‘सीबीएस न्यूज’ ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से एक खबर में यह जानकारी दी।
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अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल की शुरुआत में जब यूएस-ईरान के बीच सीजफायर का ऐलान किया गया था, उसके कुछ ही दिनों बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित 'नूर खान एयरबेस' भेजे थे। इन विमानों में खास तौर से 'RC-130' शामिल था, जो खुफिया जानकारी जुटाने और निगरानी के काम आता है। इसके अलावा ईरान ने अपने कुछ सिविलियन विमानों को सुरक्षा के लिहाज से अफगानिस्तान भी भेजा है, जिससे युद्ध के दौरान उन्हें तबाह होने से बचाया जा सके।
खबर में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए अपने नागरिक विमानों को अफगानिस्तान में खड़ा किया था। इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
साउथ कैरोलिना से सांसद ग्राहम ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अगर यह खबरें सही है तो ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर एक बार फिर पूरी तरह से विचार करने की आवश्यक होगी। ‘सीबीएस’ ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद ईरान ने पाकिस्तान के नूर खान हवाई अड्डे पर एक टोही और खुफिया विमान सहित ‘‘कई विमान’’ भेजे थे।
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वहीं पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नूर खान ‘एयर बेस’ से जुड़े दावों को खारिज करते हुए सीबीएस न्यूज से कहा कि ‘‘नूर खान हवाई अड्डा शहर के ठीक बीच में स्थित है, वहां खड़े विमानों के विशाल बेड़े को जनता की नजरों से छिपाया नहीं जा सकता।
अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि ‘महान एयर’ से संबंधित एक ईरानी नागरिक विमान युद्ध शुरू होने से कुछ समय पहले काबुल में उतरा था और ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद वहीं खड़ा रहा।
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