
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों और सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्रीय तनाव अब पश्चिम एशिया के नए मोर्चों तक फैलता दिख रहा है। सोमवार को लेबनान में सक्रिय ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह ने कहा कि उसने रात में इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन से हमला किया। संगठन के मुताबिक यह कार्रवाई “आयतुल्लाह अली खामेनेई के पवित्र खून का बदला लेने” और इजरायल के लगातार हमलों के जवाब में की गई।
यह जानकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई है। हिजबुल्लाह के बयान में कहा गया कि उसने इजरायल पर “कई मिसाइलों और बहुत सारे ड्रोन” से हमला किया।
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इजरायली सेना ने पुष्टि की कि उसने “इजरायल की ओर दागे गए रॉकेटों के जवाब में” पूरे लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर कई हवाई हमले शुरू किए। सेना का कहना है कि सीमा पार से आए एक रॉकेट को हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जबकि कुछ अन्य रॉकेट खाली इलाकों में गिरे। अभी तक किसी के घायल होने या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक साल से अधिक समय में यह पहला मौका है जब हिजबुल्लाह ने खुले तौर पर इजरायल पर हमले की जिम्मेदारी ली है।
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लेबनान सरकार पहले ही हिजबुल्लाह से अपील कर चुकी थी कि वह ईरान के समर्थन में इस टकराव में शामिल न हो। अधिकारियों को आशंका है कि इससे एक और बड़ा और नुकसानदायक युद्ध भड़क सकता है।
लेबनान अभी तक पिछले हिजबुल्लाह-इजरायल युद्ध के असर से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। वह संघर्ष नवंबर 2024 में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद थमा था। हालांकि उसके बाद भी इजरायल लेबनान में लगभग रोज हमले करता रहा है। इजरायल का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य हिजबुल्लाह को दोबारा ताकत इकट्ठा करने से रोकना है।
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हमलों के बाद लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा, “हम अपने देश को किसी नई मुसीबत या युद्ध में फंसने नहीं देंगे। जिम्मेदार लोगों को पकड़ने और लेबनान के लोगों की सुरक्षा के लिए हम सभी जरूरी कदम उठाएंगे।”
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ईरान-इजरायल टकराव से शुरू हुआ तनाव अब लेबनान तक फैल चुका है। हिजबुल्लाह की खुली भागीदारी ने हालात को और जटिल बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और जवाबी कार्रवाइयों के बीच सीमा पर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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