
ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई और तेज करते हुए मृत्युदंड की चेतावनी दी है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने भी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को उच्चतम अलर्ट पर रखने का आदेश दिया है। लगभग दो सप्ताह से जारी ये प्रदर्शन हाल के दिनों में और तेज हो गए हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है।
लगातार तेज होते प्रदर्शन के बीच ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी कि विरोध-प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले किसी भी व्यक्ति को ‘‘अल्लाह का शत्रु’’ माना जाएगा, जो मृत्युदंड योग्य अपराध है। अटॉर्नी जनरल की ये टिप्पणियां ईरान के सरकारी टेलीविजन के जरिये प्रसारित की गईं। इससे पहले, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य अधिकारियों ने संकेत दिया था कि ईरान दमनकारी कार्रवाई शुरू करने जा रहा है।
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इस्लामिक रिपब्लिक के अधिकारियों ने ब्रिटिश अखबार 'द टेलीग्राफ' को बताया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' को पिछले साल इजरायल के साथ युद्ध के मुकाबले ज्यादा अलर्ट पर रखा है, जबकि देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'द टेलीग्राफ' को बताया, "लीडर ने सेपा (आईआरजीसी) को सबसे ज्यादा तैयारी रखने का आदेश दिया है। ये जून युद्ध के मुकाबले भी ज्यादा है।"
वहीं आईआरजीसी ने भी टेलीविजन संदेश में प्रदर्शनकारियों को हद में रहने की हिदायत दी है। आईआरजीसी ने शनिवार को चेतावनी दी कि देश की सुरक्षा की रक्षा करना एक "रेड लाइन" है और सेना ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा का वादा किया है। आईआरजीसी ने कहा कि 1979 की इस्लामिक क्रांति की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, और वे किसी भी अशांति के खिलाफ सख्ती से निपटेंगे। कॉर्प्स की इंटेलिजेंस इकाई ने प्रदर्शनकारियों को "आतंकवादी दंगे" करार देते हुए चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति का जारी रहना अस्वीकार्य है और वे विदेशी ताकतों से जुड़े षड्यंत्रों को नाकाम करेंगे।
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यह बयान ऐसे समय में आया है जब आर्थिक संकट और जीवन यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन दर्जनों शहरों में फैल चुका है। ईरान में ये प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए थे और अब दर्जनों शहरों में फैल चुके हैं, जहां प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा बलों से झड़पें हो रही हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 50-60 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट के बावजूद विरोध जारी है।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'द टेलीग्राफ' को बताया, "लीडर ने सेपा (आईआरजीसी) को सबसे ज्यादा तैयारी रखने का आदेश दिया है। ये जून युद्ध के मुकाबले भी ज्यादा है।" "वह सेना या पुलिस के मुकाबले आईआरजीसी के ज्यादा करीब हैं। उन्हें अन्य के मुकाबले उन पर ज्यादा भरोसा है। उन्होंने अपनी किस्मत आईआरजीसी के हाथों में सौंप दी है।" ईरानी अधिकारियों का कहना है कि विदेशी खतरों से निपटने के लिए अंडरग्राउंड "मिसाइल सिटीज" भी एक्टिवेट कर दिए गए हैं।
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इससे पहले अपने एक बयान में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को "उपद्रवी" और "ट्रंप को खुश करने वाले" बताते हुए कहा कि इस्लामिक गणराज्य पीछे नहीं हटेगा और विदेशी ताकतों को इसका श्रेय देते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधा, जिन्होंने ईरान को प्रदर्शनकारियों पर हमले की स्थिति में हमले की धमकी दी है।
इस बीच पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू है, जिससे सूचनाओं की पुष्टि मुश्किल हो रही है। निर्वासित ईरानी राजकुमार रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से शहरों पर कब्जा करने की तैयारी करने का आह्वान किया है, जबकि सुरक्षा बलों ने "कोई सहनशीलता नहीं" की नीति अपनाई है। तेहरान और अन्य शहरों में हिंसक झड़पें जारी हैं और न्यायिक अधिकारी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मौत की सजा की धमकी दे रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर सख्त ऐतराज जताया है।
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