
ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय देशों को इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ यूएस-इजरायल कैंपेन में हिस्सा न लेने की चेतावनी देते हुए कहा कि यह “एक्ट ऑफ वॉर," यानी युद्ध की कार्रवाई, मानी जाएगी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बकाई ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूरोपीय देशों को ये चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि अगर वो इजरायल और अमेरिका के हमलों में 'डिफेंसिव एक्शन' के नाम पर शामिल होते हैं, तो इसे ईरान के खिलाफ युद्ध की घोषणा माना जाएगा।
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यह बयान जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस के उस स्टेटमेंट के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करने के लिए 'डिफेंसिव एक्शन' की बात कही थी। ईरान ने इसे आक्रामकता में भागीदारी बताया है।
जर्मनी, फ्रांस और यूके ने रविवार को कहा कि वे “ईरान की मिसाइल और ड्रोन को उनके सोर्स पर फायर करने की क्षमता को खत्म करने के लिए उसी हिसाब से डिफेंसिव एक्शन ले सकते हैं।”
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वहीं, यूरोपीय देशों ने स्पष्ट किया कि वे सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं, लेकिन अमेरिका को अपनी बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।
यूरोपीय यूनियन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन ब्रिटेन ने अमेरिकी फोर्सेस को अपनी बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। इस बीच ईरान ने रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमला किया, जिससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ गई है।
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फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने कहा कि अगर फ्रांस के सहयोगी देश मदद मांगते हैं, तो फ्रांस उनकी रक्षा को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर फ्रांस हस्तक्षेप करने का अधिकार रखता है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा ईरान संघर्ष की वजह से क्षेत्र के कई देश इसमें शामिल हो रहे हैं, जिनसे फ्रांस के रक्षा समझौते और सैन्य हित जुड़े हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि प्रभावित देशों में लगभग 4 लाख फ्रांसीसी नागरिक मौजूद हैं। अगर खतरा बढ़ता है, तो फ्रांस उन्हें कॉमर्शियल और सैन्य उड़ानों के जरिए वापस लाने के लिए तैयार है।
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