
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने इजरायल को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा है कि अगर अमेरिका और इजरायल का युद्ध जारी रखता है या ईरान में शासन परिवर्तन की कोशिश की जाती है, तो तेहरान इजरायल के एक अहम परमाणु ठिकाने को निशाना बना सकता है।
ईरान की सेमी-ऑफिशियल समाचार एजेंसी ISNA के मुताबिक, एक ईरानी सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और इजरायल ईरान में “रेजीम चेंज” यानी सत्ता परिवर्तन की कोशिश करते हैं, तो ईरान इजरायल के डिमोना परमाणु रिएक्टर को नष्ट कर सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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फारसी भाषा से अनुवादित एक संदेश टेलीग्राम पर भी सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि यदि अमेरिका और इजरायल ईरान की राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की कोशिश करते हैं, तो तेहरान इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों में स्थित डिमोना परमाणु रिएक्टर को निशाना बनाएगा।
यह चेतावनी ईरान की ओर से अब तक के सबसे तीखे बयानों में से एक मानी जा रही है।
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तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम से सैन्य कार्रवाई शुरू की।
इस अभियान की शुरुआत में ही हुए मिसाइल हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे।
इसके बाद से ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव और तेज हो गया है।
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इजरायल के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर हमेशा गोपनीयता रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इजरायल ने वर्ष 1958 में देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित डिमोना शहर के पास परमाणु हथियार विकास से जुड़ा एक केंद्र बनाना शुरू किया था।
अमेरिका की संयुक्त परमाणु ऊर्जा खुफिया समिति की दिसंबर 1960 की एक डीक्लासिफाइड खुफिया रिपोर्ट में कहा गया था कि डिमोना परियोजना में प्लूटोनियम उत्पादन के लिए रीप्रोसेसिंग प्लांट शामिल था।
रिपोर्ट के अनुसार यह परियोजना परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी हुई थी। इस संबंध में न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
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ईरान पर हमलों को लेकर अमेरिकी सरकार के भीतर भी अलग-अलग बयान सामने आए हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि यह हमला “रेजीम चेंज वॉर” नहीं है।
लेकिन दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दिए एक संदेश में ईरानी नागरिकों से कहा कि हमले खत्म होने के बाद वे अपनी सरकार के खिलाफ उठ खड़े हों। उन्होंने इसे “पीढ़ियों में शायद एकमात्र मौका” बताया।
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ईरान में शीर्ष नेतृत्व पर हुए हमलों के बाद फिलहाल तीन नेताओं की एक परिषद देश का संचालन कर रही है।
इस परिषद में शामिल हैं:
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन
आयतुल्ला अलीरेजा अराफी
मुख्य न्यायाधीश गोलाम-हुसैन मोहसेनी-एजेई
यह परिषद फिलहाल देश के राजनीतिक और प्रशासनिक फैसले ले रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अगर डिमोना जैसे संवेदनशील परमाणु ठिकानों को लेकर धमकियां और जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व के लिए और बड़ा खतरा बन सकता है।
ऐसे में आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात और अस्थिर होने की आशंका जताई जा रही है
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