
मध्य पूर्व में जारी जंग हर गुजरते दिन के साथ और खतरनाक होती जा रही है। बीती रात ईरान, इजायल-अमेरिका का टकराव और भी खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। रातभर ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों की खबरें सामने आईं, जबकि अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए।
इस बीच वॉशिंगटन से भी एक अहम खबर आई, अमेरिकी सीनेट ने वह प्रस्ताव खारिज कर दिया, जो ईरान पर हमले रोकने की कोशिश कर रहा था। इससे साफ संकेत मिला कि फिलहाल अमेरिका का सैन्य अभियान जारी रहेगा।
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अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने रातभर इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
रिपोर्टों के मुताबिक कई ड्रोन और मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ हमलों से नुकसान भी हुआ।
मिसाइलों के मलबे और हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र के कई शहरों में दहशत का माहौल बन गया। कुछ जगहों पर नागरिकों के घायल होने और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आईं।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से युद्ध शुरू होने के बाद सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल दागे गए हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर करीब 230 ड्रोन लॉन्च किए गए, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या को एयर डिफेंस सिस्टम ने रास्ते में ही रोक लिया।
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दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल ने भी ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। रिपोर्टों के अनुसार राजधानी तेहरान समेत कई इलाकों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इसके अलावा इस्फहान क्षेत्र में भी नई एयरस्ट्राइक की खबरें सामने आई हैं, जहां ईरान के मिसाइल और रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की बात कही जा रही है।
हवाई हमलों का लक्ष्य मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स, सैन्य अड्डे और सुरक्षा संस्थानों से जुड़े ठिकाने बताए जा रहे हैं।
इन हमलों के बाद ईरान के कई शहरों में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। राहत एजेंसियों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और कई शहरों में भारी नुकसान हुआ है।
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इस संघर्ष का असर अब लेबनान तक फैलता दिखाई दे रहा है।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ने लेबनान में ईरान समर्थित संगठन हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं। इसके जवाब में हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेट और ड्रोन दागे।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह मोर्चा और तेज हुआ तो संघर्ष का दायरा और बढ़ सकता है।
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युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में रणनीतिक तेल मार्गों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि अगर हमले खाड़ी देशों के सैन्य ठिकानों या समुद्री मार्गों तक फैलते हैं तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
इसी वजह से क्षेत्र के कई देशों ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
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युद्ध को लेकर अमेरिका के भीतर भी तीखी राजनीतिक बहस जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सीनेट में एक युद्ध शक्तियों का संकल्प लाया गया था, जिसका मकसद राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई को सीमित करना और ईरान के खिलाफ आगे के हमलों के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी बनाना था।
लेकिन सीनेट ने इस प्रस्ताव को 53 के मुकाबले 47 वोट से खारिज कर दिया। इससे राष्ट्रपति को सैन्य अभियान जारी रखने का रास्ता मिल गया।
इस मतदान में ज्यादातर रिपब्लिकन सांसदों ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि अधिकांश डेमोक्रेट्स इसके पक्ष में थे।
विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के बाद अमेरिका-ईरान संघर्ष के और लंबा खिंचने की आशंका बढ़ गई है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा।
मिसाइल हमलों, ड्रोन हमलों और हवाई कार्रवाई के कारण पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता बढ़ रही है। कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि कुछ देशों ने सुरक्षा कारणों से दूतावासों और सैन्य ठिकानों पर अलर्ट बढ़ा दिया है।
अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को एक बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।
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