
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने के नए नियमों से फिलहाल छूट दे दी है। ट्रंप ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ को लेकर बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने एक आधिकारिक आदेश जारी कर कई पाबंदियों और शुल्कों में छूट देने की घोषणा की है। ये प्रतिबंध उस कानून के तहत लागू होने थे, जिस पर ट्रंप ने पिछले महीने हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, नियमों के प्रभावी होने की समयसीमा नजदीक आने से पहले ही उन्होंने कुछ प्रावधानों में राहत दे दी। इस फैसले से भारत और चीन सहित रूस से ऊर्जा संसाधन खरीदने वाले कई देशों को राहत मिलने की संभावना है।
व्हाइट हाउस की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी संसद को सूचित किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तरह की छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। उनका यह कदम ऐसे समय आया है, जब रूस को लेकर उनके रुख में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। दूसरी ओर, ट्रंप यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सार्वजनिक आलोचना कर चुके हैं और उन्होंने यूक्रेन में नए नेतृत्व की जरूरत की बात भी कही है।
रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिकी संसद में जिस कानून को आगे बढ़ाया गया था, उससे रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता था। ट्रंप ने सितंबर में ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर हस्ताक्षर किए थे।
इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 30 दिनों के भीतर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। यह कार्रवाई उन देशों पर भी की जा सकती थी, जो कानून लागू होने के 30 दिन बाद भी जानबूझकर रूस से तेल या गैस खरीदना जारी रखते। इसके अलावा, रूस को मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले प्रमुख देशों को भी निशाना बनाया जा सकता था।
इस कानून को आगे बढ़ाने में सीनेटर लिंडसे ग्राहम की अहम भूमिका बताई गई थी। कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली कमाई पर दबाव डालना और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के लिए रूस से कारोबार करना महंगा बनाना था।
भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। चीन भी रूसी ऊर्जा संसाधनों का बड़ा खरीदार है। ऐसे में प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ का असर इन दोनों देशों के निर्यात कारोबार पर पड़ सकता था।
अगर भारतीय और चीनी उत्पादों पर अमेरिका में 100 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता, तो इन देशों के सामान की अमेरिकी बाजार में कीमत बढ़ सकती थी। इससे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा और कारोबार प्रभावित होने की आशंका थी।
रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में चीन और भारत के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे में ट्रंप की ओर से प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट देने का फैसला इन देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस के आदेश में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में संबंधित प्रावधानों में छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कदम के जरिए उन्होंने कानून के तहत लागू होने वाले कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों को प्रभावी होने से पहले ही राहत दे दी।
हालांकि, जारी बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किन-किन प्रतिबंधों और टैरिफ प्रावधानों को छूट के दायरे में रखा गया है। इसलिए यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि भारत और अन्य प्रभावित देशों को किस सीमा तक और किन शर्तों के तहत राहत मिलेगी।
ट्रंप का यह फैसला रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों के लिए अहम है। खास तौर पर भारत और चीन जैसे बड़े निर्यातक देशों के लिए अमेरिकी टैरिफ में संभावित राहत का असर उनके व्यापारिक हितों पर पड़ सकता है।
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