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पाकिस्तान में अब सरकार और सुप्रीम कोर्ट में टकराव, शहबाज कैबिनेट ने चुनाव पर आदेश को खारिज किया

इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ द्वारा दायर याचिका पर फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने 30 अप्रैल से 8 अक्टूबर तक पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में चुनाव स्थगित करने के पाकिस्तान के चुनाव आयोग के फैसले को अमान्य और शून्य घोषित कर दिया था।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

पाकिस्तान में सरकार और सुप्रीम कोर्ट में टकराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। पीएम शहबाज शरीफ की कैबिनेट ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव टालने के चुनाव आयोग के फैसले को अमान्य करार देने के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के सर्वसम्मत फैसले को खारिज कर दिया। जियो न्यूज ने बताया कि, मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति इजाज उल अहसन और न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर की तीन सदस्यीय पीठ के फैसले को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में खारिज कर दिया गया।

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इससे पहले पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) द्वारा दायर याचिका पर फैसले की घोषणा करते हुए शीर्ष अदालत ने 30 अप्रैल से 8 अक्टूबर तक पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में चुनाव स्थगित करने के पाकिस्तान के चुनाव आयोग के फैसले को अमान्य और शून्य घोषित कर दिया था। जियो न्यूज ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 22 मार्च, 2023 को चुनाव आयोग के आदेश को असंवैधानिक घोषित किया गया है। फैसले को बिना वैध अधिकार या अधिकार क्षेत्र के करार देते हुए रद्द कर दिया गया है।

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संघीय कैबिनेट के सूत्रों ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का फैसला अल्पमत का फैसला है, इसलिए कैबिनेट इसे खारिज करती है। जियो न्यूज ने बताया कि सूत्रों के अनुसार शीर्ष अदालत का फैसला लागू करने योग्य नहीं है। सूत्रों ने कहा कि सरकार फैसले के संबंध में संसद में आवाज उठाएगी। जियो न्यूज ने बताया कि बैठक में यह भी फैसला किया गया कि सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियां शीर्ष अदालत के फैसले के बारे में संसद में बात करेंगी।

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बैठक में कैबिनेट ने फैसले पर अपना पक्ष रखने का फैसला किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य आयोजक मरियम नवाज ने ट्विटर पर लिखा कि आज का फैसला उस साजिश का आखिरी झटका है, जो पीठ के चहेते इमरान खान को संविधान को फिर से लिखकर और पंजाब सरकार को थाली में पेश करके शुरू किया गया था।

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