
पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान-अमेरिका शांति वार्ता को बहाल करने के इस्लामाबाद के प्रयासों के बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी बुधवार को एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से मुलाकात के लिए तेहरान गए।
‘जियो न्यूज’ ने सूत्रों के हवाले से अपनी खबर में बताया कि नकवी अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर ईरानी नेताओं से चर्चा करने के लिए तेहरान रवाना हुए हैं।
इसमें कहा गया, ‘‘नकवी की यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब इस्लामाबाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों का नेतृत्व करना जारी रखे हुए है।’’ ईरान की सरकारी मीडिया ने भी नकवी की तेहरान यात्रा की खबर दी है।
ईरान के सरकारी ‘प्रेस टीवी’ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘पाकिस्तान के गृह मंत्री राजधानी तेहरान पहुंच चुके हैं। इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता में मध्यस्थता करने का प्रयास कर रहा है।’’
Published: undefined
रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई रॉबकॉफ ने कहा है कि मास्को ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं में आवश्यक होने पर मदद करने के लिए तैयार है, लेकिन वह अपनी बातों को जबरन थोपने का इरादा नहीं रखता।
रॉबकॉफ ने एक इंटरव्यू में कहा, “रूस इस संघर्ष के समाधान में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है, जो इसकी पार्टियों के लिए अच्छी तरह जाना-पहचाना है। साथ ही, हमने कभी अपनी सोच जबरन नहीं थोपीं और आगे भी थोपने का कोई इरादा नहीं है। लेकिन यदि उपयुक्त अनुरोध किया जाता है, तो हम मदद का हाथ बढ़ाएंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मास्को हमेशा और आज भी “राजनीतिक और कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से ही समाधान खोजने के लिए प्रतिबद्ध” रहा है। उनका मानना है कि किसी भी तरह के सैन्य या दबाव आधारित उपाय से स्थायी शांति स्थापित नहीं की जा सकती।
रॉबकॉफ ने अमेरिका और ईरान की ओर से वार्ता प्रक्रिया फिर से शुरू करने के प्रयासों का स्वागत किया।
ये बयान ऐसे समय में आया है जब बीजिंग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मध्य पूर्व संकट को सुलझाना विश्व शांति के लिए जरूरी बताया। वहीं जिनपिंग ने तो एकाधिपत्य और जंगलराज तक की बात कही।
जिनपिंग ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, "अगर लड़ाई नहीं रुकी तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और वैश्विक स्थिरता पर बड़ा असर पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि एकतरफा सैन्य कार्रवाई और लंबे समय तक चलने वाला युद्ध दुनिया को ऐसे दौर में ले जा सकता है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम कमजोर पड़ जाएं। ऐसी स्थिति में लड़ाई रोकना बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, "हम विश्व शासन की एक नई, अधिक तर्कसंगत और निष्पक्ष प्रणाली बनाने, दुनिया को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार हैं। दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था होनी चाहिए और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों के नए तरीके अपनाए जाने चाहिए।"
Published: undefined
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भारी बारिश और तूफान के कारण हुए हादसों में दो लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। पाकिस्तान के दैनिक अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (पीडीएमए) ने बताया कि मौतें मरदान में बारिश से जुड़ी घटनाओं में हुईं, जबकि घायल लोग बट्टाग्राम, स्वात और मरदान इलाके से हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कई इलाकों में भारी बारिश की वजह से घरों और बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हुआ है।
शांगला में तीन घर पूरी तरह से तबाह हो गए, जबकि बट्टाग्राम में एक घर पूरी तरह गिर गया। इसके अलावा 27 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इनमें तोरघर के पांच घर, स्वात के दो घर, ऊपरी दीर का एक घर और मरदान का एक घर शामिल है। शांगला में एक स्कूल को भी नुकसान हुआ है।
पाकिस्तान मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि 23 मई तक देश के ऊपरी हिस्सों में धूल भरी आंधी और बीच-बीच में बारिश होती रहेगी।
इससे पहले अप्रैल में भी खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर, मोहमंद और नौशेरा जिलों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 14 लोग घायल हुए थे।
'रेस्क्यू 1122' के प्रवक्ता बिलाल अहमद फैजी ने बताया कि पेशावर के मट्टानी इलाके में छत गिरने से एक बच्चे की मौत हो गई और दो बच्चे घायल हो गए। उन्होंने बताया कि मोहमंद जिले में बारिश से जुड़ी एक घटना में एक ही परिवार के तीन लोग घायल हो गए।
Published: undefined
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को कहा कि कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के फैलने का खतरा राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर तो अधिक है लेकिन वैश्विक स्तर पर कम है।
यह जोखिम मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब कांगो में डब्ल्यूएचओ टीम के प्रमुख ने कहा है कि इस प्रकोप के कारण 134 संदिग्ध मौतें हुई हैं और उसके प्रसार को रोकने के लिए सहायता प्रयासों को तेज किए जाने के बावजूद यह स्थिति कम से कम दो महीने और बनी रह सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय मानते हुए एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है तथा उसके लिए समन्वित जवाबी कार्रवाई की जरूरत बतायी है। मंगलवार को डब्ल्यूएचओ ने प्रकोप के ‘पैमाने और गति’ पर चिंता व्यक्त की।
इबोला उर्फ ‘बुंडीबुग्यो’ वायरस के लिए अभी तक कोई स्वीकृत दवा या टीका उपलब्ध नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बुधवार को बताया कि अब तक कांगो के उत्तरी प्रांतों इटुरी और उत्तरी किवू में 51 मामले तथा युगांडा में दो मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, लगभग 600 संदिग्ध मामले और संदिग्ध मौतें भी हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि महामारी का पैमाना कहीं अधिक व्यापक है। हमें आशंका है कि ये संख्याएं बढ़ती रहेंगी।’’
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि वायरस का देर से पता चलना, प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन और पहले से मौजूद मानवीय संकट ने राहत कार्यों को जटिल बना दिया।
उनका कहना था कि पूर्वी कांगो के कुछ हिस्से सशस्त्र विद्रोहियों के कब्जे में हैं जिससे सहायता पहुंचाने में बाधा आ रही है।
Published: undefined