
पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे को उछालने की कोशिश की है। लेकिन इस बार बड़ी बात यह है कि उसने साथ-साथ परमाणु हमले की संभावना को तूल दे दिया है। पाकिस्तान पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। बावजूद इसके उसने भारत के साथ अपने संबंधों को तल्खी में एक नया आयाम जोड़ दिया है।
अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने धमकी भरे अंदाज में कहा है कि उनके देश ने भारतीय खतरे का मुकाबला करने के लिए कम दूरी के परमाणु हथियारों को विकसित किया है। हालांकि उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि देश के कट्टरपंथी ताकतों की इन परमाणु हथियारों तक पहुंच किसी हालत में संभव नहीं है और पाकिस्तान के परमाणु हथियार सुरक्षित हाथों में हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री उस धारणा को खत्म करने की कोशिश कर रहे थे कि पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षित ढंग से संभाला नहीं जा रहा है।
कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने कहा कि 1948 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के प्रस्ताव को लागू किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों की आजादी के हक की लड़ाई का समर्थन करता रहेगा। उनका यह भी कहना था कि भारत और पाकिस्तान के रिश्ते में कश्मीर सबसे बड़ा और बुनियादी मुद्दा है। उन्होंने भारतीय सेना पर भी आरोप लगाया कि नियंत्रण रेखा पर उसने लगातार तनाव बनाए रखा है, ताकि कश्मीर के मुद्दे को दबाया जा सके।
उधर बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दो दिनों की शांति के बाद पाकिस्तानी सैनिकों ने जम्मू की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अर्निया सेक्टर में बीएसएफ की चौकी पर भीषण गोलाबारी शुरू कर दी है।
दूसरी तरफ पुलवामा जिले के त्राल के एक व्यस्त बस अड्डे के पास जम्मू-कश्मीर सरकार में मंत्री नईम अख्तर पर आतंकवादियों ने ग्रेनेड फेंका। इस हमले में नईम अख्तर तो बच गए, लेकिन दो नागरिकों की जान चली गई है।
इन कार्रवाईयों को देखकर तो यही लगता है कि भारत के साथ पाकिस्तान के टकराव में निकट भविष्य में कमी नहीं आने वाली है और पाकिस्तान की चाहत भी इसे बनाए रखने की है। शायद पाकिस्तान के रहनुमाओं ने अपनी अंदरूनी हालत से निपटने के लिए यही तरकीब ढूढ़ी है।
Published: 21 Sep 2017, 2:47 PM IST
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Published: 21 Sep 2017, 2:47 PM IST